
Commissioner's notice to officers in MP created a stir
Commissioner's notice - एमपी में कर्मचारियों, अधिकारियों की लापरवाही, कामचोरी, धरना, प्रदर्शन, हड़ताल आदि गतिविधियों से प्रशासन सख्ती से निपटने के मूड में है। यह बात तब सामने आई जब नर्मदापुरम में नायब तहसीलदारों, तहसीलदारों को नोटिस जारी कर दिए गए। ये अधिकारी पिछले दिनों हड़ताल पर थे जिससे आमजनों को खासी दिक्कतें आई थीं। कमिश्नर ने इसे कदाचार और अनुशासनहीनता बताते हुए कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब कर लिया है। इस सख्ती से नायब तहसीलदार, तहसीलदारों में खलबली सी मच गई है।
न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्य विभाजन के सरकार के फैसले से नाराज तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने काम बंद हड़ताल की थी। नर्मदापुरम संभाग में ये सभी अधिकारी 8 अगस्त से 17 अगस्त तक हड़ताल पर रहे। हड़ताल पर जाने से पहले तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने कलेक्टर को बाकायदा सूचना भी दी थी। राजस्व अधिकारी संघ, कनिष्ठ प्रशासनिक संघ के आव्हान पर अधिकारियों ने आपदा प्रबंधन को छोड़कर अन्य कोई काम नहीं किया।
तहसीलदारों, नायब तहसीलदारों की हड़ताल से जनता से जुड़े काम, जमीन आदि के नामांतरण जैसी सेवाएं ठप हो गईं। राजस्व प्रकरण पेंडिंग होते चले गए। कमिश्नर कृष्ण गोपाल तिवारी ने इसके लिए अब सभी अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। उन्होंने इसे अनुशासनहीनता और कदाचार की श्रेणी में बताते हुए अधिकारियों से 15 दिन में जवाब तलब किया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
कमिश्नर ने अधिकारियों से कहा है कि 8 अगस्त से 17 अगस्त तक वे कर्तव्य स्थल से अनुपस्थित रहे। इस दौरान सरकारी कामकाज ठप हो गया, आमजन भी परेशान हुए। कमिश्नर ने कहा कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के अंतर्गत शासकीय सेवक का हड़ताल, धरना और सामूहिक अवकाश पर जाना प्रावधानों के खिलाफ है।
Published on:
22 Aug 2025 09:18 pm
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