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MP News:नर्मदापुरम जिले (Narmadapuram) में जिला शिक्षा केंद्र द्वारा 15 शासकीय हिन्दी माध्यम के स्कूलों को अंग्रेजी माध्यम का किया गया। लेकिन लंबा अरसा बीत जाने के बाद भी जिम्मेदार विभाग के आला अधिकारियों ने यहां अंग्रेजी माध्यम के डिग्रीधारी फुलफेश शिक्षकों की पदस्थापना नहीं की। वर्तमान में इन सभी इंग्लिश मीडियम के स्कूलों (english medium schools) में पढ़ाई की जिम्मेदारी हिंदी मीडियम के प्रतिनियुक्ति शिक्षकों पर ही टिकी हुई है।
इस वजह से कई बार शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं में उलझे शिक्षक पीरियड तक नहीं ले पाते हैं। इस तरह भगवान भरोसे चल रहे हैं जिले के सभी 15 अंग्रेजी माध्यम के स्कूल कागजी खानापूर्ति कर विभागीय अधिकारी इंग्लिश मीडियम स्कूल चलाने का दावा कर रहे हैं।
दरअसल स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा खोले गए अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के मामले में खुद विभाग के अधिकारी ही गंभीर नहीं है। नियम अनुसार अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम के फुल फेश शिक्षकों की जरूरत होती है। ऐसे इंग्लिश मीडियम में पढ़े लिखे युवा-युवतियों को अतिथि के तौर पर पदस्थ कर उनकी सेवाएं ली जा सकती है ताकि इन अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सके।
ऐसी है स्थिति जिले की 8 प्राथमिक शालाओं में 674 दर्ज बच्चों की संख्या पर 6 प्रतिनियुक्ति हिन्दी मीडियम शिक्षक है। वही 7 माध्यमिक शाला में 260 दर्ज बच्चों की संख्या पर 7 प्रतिनियुक्ति हिन्दी मीडियम शिक्षक हैं। कक्षा 8 वीं के बाद कोई योजना नहीं होने से विद्यार्थियों संख्या कम है। अंग्रेजी माध्यम के पढ़े बच्चों के लिए कक्षा 8 वीं के बाद अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की योजना नहीं होने से विद्यार्थियों की संख्या कम है।
कागजों में चल रहे इन सरकारी इंग्लिश मीडियम के स्कूलों की पढ़ाई ट्रेंड शिक्षकों के अभाव में भगवान भरोसे है। प्रतिनियुक्ति हिन्दी मीडियम शिक्षकों के भरोसे प्राथमिक और माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों की पढ़ाई चल रही है। मालूम हो सोहागपुर, पिपरिया, बनखेड़ी, नर्मदापुरम में अंग्रेजी माध्यम के सरकारी शुरु हुए हैं।
राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा योजना शुरु की गई थी। ताकि हिंदी के साथ ही अंग्रेजी शिक्षा को भी बढ़ावा मिल सके। स्कूलों के लिए अलग से अंग्रेजी विषय के शिक्षकों की नई नियुक्ति नहीं हुई। शाला में पढ़ाने वाले अंग्रेजी विषय के शिक्षकों द्वारा पढ़ाया जा रहा है।- डॉ. राजेश जयसवाल, डीपीसी
Updated on:
22 Sept 2025 09:58 am
Published on:
22 Sept 2025 09:58 am
