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नर्मदापुरम-टिमरनी 4-लेन परियोजना: 4.33 हेक्टेयर जमीन का होगा अधिग्रहण, आसान होगा सफर

Four-lane project: सड़क निर्माण पूर्ण होने के बाद यात्रा समय में कमी आएगी, माल परिवहन सुगम होगा तथा स्थानीय व्यवसायों को नए अवसर मिल सकेंगे।

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Four-lane project land acquisition: परियोजना को लेकर होगा भूमि अधिग्रहण (Photo Source- freepik)

Four-lane project land acquisition: परियोजना को लेकर होगा भूमि अधिग्रहण (Photo Source- freepik)

Four-lane project land acquisition: नर्मदापुरम-टिमरनी मार्ग के अपग्रेडेशन एवं फोरलेन निर्माण परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। भू- अर्जन, पुनर्वास एवं रिसैटेलमेंट में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया की जा रही है। इसी क्रम में प्रभावित ग्रामों में जनसुनवाई आयोजित कर किसानों, भूमि स्वामियों और ग्रामीणों से सुझाव एवं आपत्तियां प्राप्त की गईं।

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार परियोजना के लिए सिवनी मालवा क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों में कुल 4.33 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव है। इसमें ग्राम बनापुरा की 2.784 हेक्टेयर, बराखड़ कला की 0.308 हेक्टेयर, बराखड़ खुर्द की 0.475 हेक्टेयर तथा दमडिय़ा की 0.763 हेक्टेयर भूमि शामिल है। प्रस्तावित भूमि का उपयोग सड़क चौड़ीकरण, निर्माण कार्य एवं अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।

लोगों का आवागमन होगा आसान

जनसुनवाई के दौरान अधिकांश ग्रामीणों ने परियोजना को क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। ग्रामीणों का कहना था कि बेहतर सड़क संपर्क से आवागमन आसान होगा, परिवहन लागत कम होगी तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। कई स्थानों पर लोगों ने परियोजना के प्रति समर्थन जताते हुए अपनी सहमति भी दर्ज कराई। सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि मार्ग के उन्नयन से नर्मदापुरम, टिमरनी और आसपास के क्षेत्रों के बीच संपर्क मजबूत होगा। कई गांवों की समस्याएं भी खत्म होंगी।

आने-जाने में कम लगेगा समय

सड़क निर्माण पूर्ण होने के बाद यात्रा समय में कमी आएगी, माल परिवहन सुगम होगा तथा स्थानीय व्यवसायों को नए अवसर मिल सकेंगे। रिपोर्ट में यह भी संभावना जताई गई है कि निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा। परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं का परीक्षण निर्धारित नियमों के तहत पृथक रूप से किया जाएगा।

भूमि अधिग्रहण के लिए होगी कार्रवाई

पर्यावरणीय स्वीकृति सहित अन्य आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की पूरी कार्रवाई पारदर्शी एवं कानूनी प्रावधानों के अनुरूप की जाएगी तथा प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों के हितों का ध्यान रखा जाएगा। जनसुनवाई एवं सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम प्रतिवेदन शासन को भेजा जाएगा। इसके आधार पर भूमि अधिग्रहण की आगामी कार्रवाई और परियोजना के क्रियान्वयन से संबंधित निर्णय लिए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।