
Pachmarhi Nagdwari Yatra नागद्वारी यात्रा शुरू (Source: MP Tourism)
Pachmarhi Nagdwari Yatra: नागद्वारी मेले का आज 8 अगस्त से शुभारंभ हो गया है। यह 10 दिवसीय मेला 17 अगस्त तक रहेगा। इस वर्ष नागद्वारी मेले का आयोजन ग्रीन एवं प्लास्टिक मुक्त मेले की थीम पर किया जा रहा है। कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने निर्देश दिए कि मेले में प्रवेश करने वाले सभी वाहनों की सघन जांच की जाए तथा प्लास्टिक की बोतलों एवं अन्य एकल-उपयोग प्लास्टिक सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। जांच स्थल पर यह सुनिश्चित किया जाए कि वाहनों में कितनी प्लास्टिक की बोतलें मेले के भीतर ले जाई जा रही हैं, तथा कोई भी पर्यटक पचमढ़ी क्षेत्र में प्लास्टिक की बोतलें छोड़कर न जाए और पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य प्रभावी रूप से पूरा हो।
वहीं सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने नागद्वारी यात्रा और मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने रचनात्मक और एनिमेटेड वीडियो संदेश जारी किया है। वीडियो के माध्यम से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक धरोहर और वन्यजीवों के संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं। जारी एनिमेटेड वीडियो में दिखाया है कि एक श्रद्धालु पचमढ़ी स्थित नागद्वारी गुफा और देवस्थल के दर्शन करने दुर्गम रास्तों से गुजर रहा है। रास्ते में उसकी मुलाकात एक विशाल 'नागदेव' (सांप) से होती है। इनके बीच कुछ इस तरह संवाद होता है।
जंगल वन्यजीवों का भी घर: बातचीत के दौरान नागदेव श्रद्धालु को याद दिलाते हैं कि जिस कठिन रास्ते से श्रद्धालु दर्शन करने जा रहे हैं, वह सिर्फ इंसान का रास्ता नहीं है, बल्कि इस जंगल में रहने वाले असंख्य जीवों और वन्यप्राणियों का घर भी है।
नागदेव बताते हैं कि जब श्रद्धालु दर्शन के बाद जंगल में प्लास्टिक की बोतलें, रैपर, दोने-पत्तल और पुराने कपड़े छोड़ जाते हैं, तो इससे प्रकृति और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचता है।
जब श्रद्धालु तर्क देता है कि लोग आस्था और श्रद्धा वश कपड़े या प्रसाद सामग्री छोड़ते हैं, तो नागदेव समझाते हैं कि श्रद्धा मन में होती है, जंगल में कपड़े या प्लास्टिक कचरा छोडऩे में नहीं। अगर आप भगवान का आशीर्वाद लेकर लौट रहे हैं, तो उनके बनाए इस जंगल का भी सम्मान करें।
सीख मिलने के बाद श्रद्धालु जंगल में बिखरे प्लास्टिक और कचरे को खुद उठाकर अपने बैग में भरकर वापस ले जाने का संकल्प लेता है। अंत में नागदेव प्रसन्न होकर उसे पंचमुखी अवतार में आशीर्वाद देते हैं।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वह पानी की बोतलें, पॉलीथिन व अन्य प्लास्टिक सामग्री जंगल में न फेंकें। यात्रा के दौरान अपने साथ लाए सामान, पुराने कपड़े या कचरे को जंगल में छोडऩे के बजाय वापस साथ ले जाएं। नागद्वारी की पवित्र यात्रा केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में ही सच्ची तीर्थ यात्रा है।
Updated on:
08 Aug 2026 05:01 pm
Published on:
08 Aug 2026 05:01 pm
