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कोरोनाकाल में तीन कक्षों में पढ़ रहे चार कक्षाओं के बच्चे

यहां स्थित स्कूल में मात्र तीन कक्ष हैं, जिसमें 267 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। इस कारण विद्यालय में 50 फीसदी बच्चे बिठाना भी किसी चुनौती से कम नहीं हैं.

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school news

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पनारी-गाडरवारा. मध्यप्रदेश में कई ऐसे स्कूल हैं, जहां बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण पूरे बच्चों को बिठाकर पढ़ाना किसी चुनौती से कम नहीं है, ऐसा ही एक मामला पनारी-गाडरवारा के तहत आने वाले एक गांव के स्कूल में बन रहे हैं, यहां स्थित स्कूल में मात्र तीन कक्ष हैं, जिसमें 267 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। इस कारण विद्यालय में 50 फीसदी बच्चे बिठाना भी किसी चुनौती से कम नहीं हैं, अगर 100 फीसदी बच्चों के साथ स्कूल खोलने पड़े, तो यहां पैर रखने की जगह भी नहीं बचेगी। लेकिन जिम्मेदारों का इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं है।

चीचली के ग्राम पंचायत पनारी में स्थित शासकीय हाईस्कूल को उन्नयन कर हायरसेकेंडरी में तब्दिल कर दिया गया है। अब यहां कक्षा 9 से 12 तक की चार कक्षाएं लगती है, लेकिन विद्यालय भवन में मात्र तीन कक्ष ही हैं। जिसमें कुल 267 बच्चे अध्यनरत हैं, ऐसे में कैसे तीन कक्ष में चार कक्षाएं लगाएं ओर 267 बच्चों को कैसे बिठाएं चिंता का विषय है।

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50 फीसदी बच्चों के साथ खुल रहा स्कूल


फिलहाल कोरोनाकाल होने के कारण स्कूल में 50 फीसदी बच्चे बुलाए जा रहे हैं, इस कारण सोशल डिस्टेसिंग सहित अन्य नियमों का पालन करने में कोई दिक्कत नहीं हो रही है। लेकिन अगर 100 प्रतिशत बच्चों को स्कूल बुलाया जाएगा, तो कैसे बच्चों को कक्षा में बिठाएंगे, चिंता विषय है, क्योंकि इतने बच्चों को एक बेंच पर दो से तीन बिठाने के बाद भी कई बच्चे खड़े रह जाते हैं। आश्चर्य की बात तो यह है कि हायर सेकेंडरी स्कूल होने के बावजूद यहां शिक्षकों के लिए ऑफिस नहीं है.

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माध्यमिक शाला में बिठाएं बच्चे तो दुर्घटना का भय


हालांकि हायरसेकेंडरी स्कूल के सामने ही माध्यमिक विद्यालय है, लेकिन एक कक्षा अगर वहां लगाते हैं, तो बच्चों को सड़क पार करके दूसरी ओर जाना पड़ेगा, ऐसे में वाहनों का आवागमन अधिक होने के कारण दुर्घटना का भय भी बना रहता है।


हम मौके पर जाकर देखेंगे, अतिरिक्त कक्ष के लिए जो व्यवस्था होगी, जल्द ही की जाएगी।
-जेएस विल्सन, जिला शिक्षा अधिकारी