
सोशल मीडिया पर परिवार के आर्थिक मजबूत होने को लेकर छिड़ी बहस (Photo-AI)
Lifestyle Inflation: यदि कोई परिवार 3 लाख रुपये महीने कमाता है तो उसे एक आरामदायक और मजबूत आर्थिक स्थिति माना जा सकता है। लेकिन इसके बाद भी क्या वह परिवार वास्तव में आर्थिक रूप से सुरक्षित होता है? सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है, जिसके बाद इस सवाल पर बहस छिड़ गई है।
बृहस्.ai के को-फाउंडर डॉ. सनी गर्ग ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे 3 लाख रुपये महीने की संयुक्त आय भी किसी परिवार को आर्थिक दबाव से मुक्त नहीं करती। उन्होंने एक ऐसे दंपती का उदाहरण दिया, जिनमें पति और पत्नी दोनों 1.5-1.5 लाख रुपये महीने कमाते हैं। यानी परिवार की कुल मासिक आय 3 लाख रुपये है।
डॉ. गर्ग के मुताबिक, ऐसे परिवार की आय का बड़ा हिस्सा घर की EMI या किराये में 60 से 70 हजार रुपये तक जा सकता है। इसके अलावा बच्चों की स्कूल फीस पर 25 से 30 हजार, कार की ईएमआई, पेट्रोल-डीजल और अन्य परिवहन खर्च, माता-पिता की जिम्मेदारियां, एसआईपी, वीकेंड आउटिंग और अलग-अलग सब्सक्रिप्शन जैसे खर्च भी जुड़ जाते हैं।
इन सभी खर्चों को जोड़ने के बाद परिवार को महीने के अंत तक यह महसूस हो सकता है कि उसकी पूरी आय केवल एक महंगी जीवनशैली को बनाए रखने में ही जा रही है।
डॉ. गर्ग ने इस स्थिति को लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन से जोड़ते हुए कहा कि समस्या हमेशा खर्चों की संख्या नहीं होती, बल्कि यह भी होती है कि समय के साथ परिवार अपनी आर्थिक प्रतिबद्धताओं को दो आय पर निर्भर बना लेता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि घर इसलिए लिया गया क्योंकि दोनों की कमाई है। बच्चों के लिए महंगा स्कूल इसलिए चुना गया क्योंकि दो आय हैं। कार अपग्रेड इसलिए की गई क्योंकि दो आय हैं और इसी तरह धीरे-धीरे पूरा लाइफस्टाइल दो कमाई को ध्यान में रखकर तैयार हो जाता है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में अगर अचानक पति या पत्नी में से किसी एक की आय रुक जाए तो परिवार के लिए उसी जीवनशैली को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
डॉ. गर्ग के मुताबिक, आर्थिक रूप से मजबूत होने का मतलब सिर्फ ज्यादा कमाई करना नहीं है। असली सवाल यह है कि अगर परिवार की एक आय अचानक बंद हो जाए तो वह अपनी मौजूदा जीवनशैली को कितने समय तक बिना बड़े बदलाव के चला सकता है।
उन्होंने कहा कि संपत्ति और आर्थिक आजादी का मतलब केवल कमाई बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसी जिंदगी बनाना भी है जो किसी एक आय के रुकने पर पूरी तरह न बिखरे।
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि 3 लाख रुपये महीने की कमाई कागज पर भले ही समृद्ध दिखे, लेकिन वास्तविक जीवन में यह आय काफी कम महसूस हो सकती है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि जैसे-जैसे आय बढ़ती है, अक्सर उसके साथ उस आय पर आधारित जीवनशैली भी बढ़ती जाती है।
डॉ. गर्ग की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। एक यूजर ने इसे बिल्कुल सही बताते हुए कहा कि यह स्थिति आज कई परिवारों में देखने को मिलती है।
एक अन्य यूजर ने अपने रिश्तेदारों का उदाहरण देते हुए लिखा कि उसके भाई और भाभी सरकारी शिक्षक हैं और दोनों की संयुक्त आय 2 लाख रुपये से ज्यादा है, लेकिन EMI के बोझ के कारण वे हर महीने के अंत में आर्थिक परेशानी की बात करते हैं।
वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा कि लोग फ्लैट, कार, SIP और दूसरी चीजों पर खर्च करते हैं और फिर कहते हैं कि उन्हें आर्थिक रूप से संपन्न महसूस नहीं हो रहा।
Updated on:
09 Sept 2026 05:51 pm
Published on:
09 Sept 2026 05:51 pm
