
Indian Railways (Photo-IANS)
Modi Cabinet Railway Projects : नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में भारतीय रेलवे से जुड़ी पांच महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं पर करीब 10,021 करोड़ रुपए खर्च होंगे और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के मुताबिक, परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे नेटवर्क की क्षमता में करीब 540 किलोमीटर का इजाफा होगा। इससे दक्षिण भारत के प्रमुख राज्यों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही भी सुगम होगी।
अरक्कोनम-रेनिगुंटा : तीसरी और चौथी लाइन, 77 किमी
व्हाइटफील्ड-बंगारपेट : तीसरी और चौथी लाइन, 47 किमी
होसुर-ओमालुर : दोहरीकरण, 147 किमी
सेलम-करूर-दिंडीगुल : दोहरीकरण, 159 किमी
सिकंदराबाद (घाटकेसर)-काजीपेट : मल्टीट्रैकिंग, 110 किमी
मंजूर परियोजनाएं तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों को कवर करेंगी। सरकार के अनुसार इन परियोजनाओं से करीब 2,121 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इन गांवों में लगभग 52 लाख लोग रहते हैं। अतिरिक्त ट्रैक बनने से व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और ट्रेनों के संचालन में अधिक लचीलापन आएगा। रेल मंत्रालय के मुताबिक, लाइन क्षमता बढ़ने से परिचालन दक्षता में सुधार होगा और रेल सेवाओं की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, खाद्यान्न, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की ढुलाई के लिहाज से अहम हैं। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सालाना करीब 47 मिलियन टन (47 MTPA) की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने का अनुमान है। इससे माल परिवहन अधिक तेज और कुशल होने की उम्मीद है।
इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गई है। इसका उद्देश्य विभिन्न परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना और देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार का कहना है कि रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही तेज होगी। इससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलने के साथ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
रेल नेटवर्क के विस्तार का लाभ कई प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों को मिलने की उम्मीद है। इनमें तिरुपति, तिरुत्तानी, तिरुचानूर, कोटिलिंगेश्वर मंदिर, बंगारू तिरुपति, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल जलप्रपात, होसुर किला, मेट्टूर बांध, कोडाइकनाल हिल्स, सत्यमंगलम वन्यजीव अभयारण्य, नमक्कल अंजनेयर मंदिर, यदागिरिगुट्टा मंदिर और भोंगिर किला प्रमुख हैं। सरकार के अनुसार बेहतर रेल संपर्क से इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सरकार ने इन परियोजनाओं को पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया है। रेलवे को सड़क परिवहन की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण-अनुकूल माध्यम माना गया है। परियोजनाओं के पूरा होने पर देश के तेल आयात में करीब 8 करोड़ लीटर की कमी आने का अनुमान है। इसके साथ ही लगभग 42 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने की संभावना है। सरकार के अनुसार यह पर्यावरणीय लाभ करीब 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगा।
Updated on:
09 Sept 2026 04:52 pm
Published on:
09 Sept 2026 04:52 pm
