
अरविंद केजरीवाल (Photo - ANI)
एक साथ लोकसभा चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस (Congress) और आम आदमी पार्टी - आम (Aam Aadmi Party - AAP) अब पंजाब में आमने-सामने हैं। गुलजार सिंह आत्महत्या मामले में दोनों राजनीतिक दल एक-दूसरे पर निशाने साध रहे हैं। कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी पर आरोप लगाया है कि गुलजार ने आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा से नशे पर सवाल पूछा तो उसे डराया-धमकाया गया और इतना दबाव डाला गया कि उसने अपनी जान दे दी। मौत से पहले गुलजार ने वीडियो शेयर करते हुए चीमा को अपनी मौत का ज़िम्मेदार ठहराया। कांग्रेस ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पंजाब को नशे के दलदल में धकेल दिया है। ड्रग्स माफिया सरकार चला रहे हैं और उनके खिलाफ आवाज उठाने वालों को इतना प्रताड़ित किया जाता है कि वो जान देने को मजबूर हो जाते हैं। इस अपराध के लिए पंजाब की जनता आम आदमी पार्टी को कभी माफ़ नहीं करेगी। इस मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जब आम आदमी पार्टी की सरकार पर निशाना साधा तो आप संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने भी राहुल पर निशाना साधा।
केजरीवाल ने राहुल पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, "राहुल जी, पंजाब सरकार नशे के विरुध्द निर्णायक युद्ध लड़ रही है। पंजाब में नशा कौन लाया? आपकी कांग्रेस सरकार लाई। अकाली दल और बीजेपी की सरकार लाई। पहली बार पूरे देश में कोई राज्य नशे के ख़िलाफ इस तरह से युद्ध छेड़ रहा है। आज पंजाब सरकार कांग्रेस, अकाली दल और बीजेपी के फैलाये नशे को साफ करने की कोशिश कर रही है। मुझे बेहद दुःख है कि आप जैसा नेता लाशों के ऊपर गंदी राजनीति कर रहा है। इस व्यक्ति की मौत पर राजनीति करने के लिए कल आपके विधायक भी जब उस गांव में गये तो गांव वालों ने उन्हें निकाल दिया। यह वीडियो देखिए। वो इसलिए क्योंकि जो आपने लिखा है वो सरासर झूठ है। मेरा आपसे निवेदन है कि आप भी एक चक्कर इस गांव का लगाकर आ जाइए। हमारी सरकार के किसी मंत्री, किसी विधायक का इस व्यक्ति की मौत से कोई लेना देना नहीं और आप इस तरह की गंदी राजनीति मत कीजिए।"
राहुल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "पंजाब की आप सरकार में एक खतरनाक पैटर्न दिख रहा है। सरकारी नाकामी पर सवाल करोगे, तो जवाब धमकी और टॉर्चर से मिलेगा। अपने बेटे को नशे का शिकार बनते देखने वाले, दलित समुदाय से आने वाले गुलजार सिंह जी ने वित्त मंत्री से सिर्फ इतना पूछा कि सरकार ड्रग्स का कारोबार रोकने में इतनी बुरी तरह नाकाम क्यों है? बस इस बात पर उन्हें इतना प्रताड़ित और अपमानित किया गया, माफी मांगने के लिए इतना दबाव बनाया गया कि उन्होंने जहर खा लिया। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते हुए, इलाज के अभाव में, आखिरकार वो ज़िंदगी की जंग हार गए। पिछले हफ्ते मैंने एक युवा मोहनजीत सिंह से भी बात की, जिन्हें मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ़ प्रदर्शन करने पर प्रताड़ित किया गया। सरकार का काम जनता को जवाब देना है, सवाल पूछने वालों को कुचलना नहीं। गुलजार सिंह जी के परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिले। मुख्यमंत्री तत्काल वित्त मंत्री का इस्तीफा लें और सुनिश्चित करें कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच हो जिसकी एफआईआर में उनका नाम दर्ज किया जाए।"
Updated on:
09 Sept 2026 04:46 pm
Published on:
09 Sept 2026 04:44 pm
