
होर्डिंग विवाद मामले में अभिषेक बनर्जी से 6 घंटे तक पूछताछ (फोटो सोर्स- ANI)
Abhishek Banerjee Controversy: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी से पुलिस ने लगातार 6 घंटे तक पूछताछ की। यह पूरा मामला कैमक स्ट्रीट स्थित टीएमसी कार्यालय से अनधिकृत होर्डिंग हटाने के दौरान हुई पुलिस और केएमसी अधिकारियों के साथ झड़प से जुड़ा हुआ है। थाने से बाहर निकलने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए अभिषेक बनर्जी ने राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी पार्टी के खिलाफ 'राजनीतिक बदले की भावना' से काम कर रही है।
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि 27 अगस्त को उनके कार्यालय से होर्डिंग हटाने के नाम पर नगर निगम और पुलिस प्रशासन के करीब 1,000 लोगों को भेजा गया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर किसी को लगता है कि झूठे मुकदमों से TMC को डराया या रोका जा सकता है, तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल है। वे अपनी पूरी ताकत लगा लें। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में गिरफ्तार किए गए टीएमसी कार्यकर्ताओं को हिरासत में परेशान किया जा रहा है।
27 अगस्त को कोलकाता नगर निगम (KMC) की टीम पुलिस बल के साथ लोहे के ढांचे पर लगे अवैध होर्डिंग को हटाने पहुंची थी। आरोप है कि इस दौरान टीएमसी समर्थकों, निजी सुरक्षा गार्डों और पार्टी नेताओं ने अधिकारियों का विरोध किया, जिसके बाद हाथापाई की स्थिति बन गई। इस घटना के बाद पुलिस ने कुल 3 FIR दर्ज की हैं, जिनमें से 2 FIR में अभिषेक बनर्जी समेत कई नेताओं पर है।
मामले में शामिल TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओब्रायन ने पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षाकर्मियों पर लगे आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस एक 'अवैध' नोटिस लेकर कार्यालय में दाखिल हुई थी। पहला समन अनदेखा करने के बाद पुलिस ने उनके घर पर दूसरा नोटिस भेजा है और उन्हें 2 सितंबर को जांच अधिकारी के सामने पेश होने को कहा है।
अभिषेक बनर्जी के वकीलों का कहना है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35 के तहत नोटिस तो थमा दिए गए, लेकिन FIR की प्रति ऑनलाइन अपलोड नहीं की गई। वकीलों के मुताबिक यह सुप्रीम कोर्ट के नियमों का उल्लंघन है और इस मामले में पुलिस पर कोर्ट की अवमानना (कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट) की कार्रवाई हो सकती है।
भाजपा नेता और राज्य सरकार की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने टीएमसी के तमाम आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में सब समान हैं। अगर कोई ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर हमला करता है या उन्हें परेशान करता है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया का सामना करना ही पड़ेगा। इसमें किसी भी तरह की राजनीतिक बदले की भावना शामिल नहीं है।
Updated on:
02 Sept 2026 07:44 am
Published on:
02 Sept 2026 07:38 am
