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पाकिस्तान में अल्पसंख्यक महिलाओं पर खतरा: 2025 के कुल मामलों में 75% हिंदू बेटियों का कराया गया जबरन धर्मांतरण

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का जीना मुश्किल हो गया है। अल्पसंख्यक महिलाओं-बेटियों से जबरन धर्मांतरण और निकाह के मामलों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।
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भारत

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Vinay Shakya

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Updated: 25 Apr 2026, 4:43 AM IST

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प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के जबरन धर्मांतरण और निकाह के बढ़ते मामलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञों ने हालिया रिपोर्ट में इसे निरंतर और व्यापक पैटर्न करार दिया है। UN की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में जबरन धर्मांतरण का शिकार हुई कुल लड़कियों में से 75 प्रतिशत हिंदू समुदाय से हैं।

पाकिस्तान में निशाने पर हिंदू बेटियां

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के जबरन धर्मांतरण पर UN की रिपोर्ट में चौकाने वाला खुलासा हुआ है। UN की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2025 में जबरन धर्मांतरण का शिकार हुई कुल लड़कियों में से 75 प्रतिशत हिंदू समुदाय से हैं, जबकि 25 प्रतिशत ईसाई समुदाय से हैं। धर्मांतरण के लगभग 80 प्रतिशत मामले सिंध प्रांत में दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि किशोरियों (14 से 18 वर्ष) को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है, हालांकि कुछ पीड़ित इससे भी छोटी उम्र की हैं।

UN ने जताई चिंता, जांच एजेंसियों पर भी उठाए सवाल

UN ने स्पष्ट कहा कि किसी भी धर्म परिवर्तन में जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए। निकाह पूरी तरह स्वतंत्र और सूचित सहमति पर आधारित होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नाबालिग बच्चा ऐसी सहमति देने में सक्षम नहीं माना जाता। पीड़ित लड़कियों को अक्सर शारीरिक-यौन शोषण, सामाजिक कलंक और गंभीर मानसिक आघात का सामना करना पड़ता है। रिपोर्ट में पुलिस और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। कई मामलों में परिवारों की शिकायतों को खारिज कर दिया जाता है, उम्र का सही आकलन नहीं किया जाता और दोषियों को संरक्षण मिलता है।

UN की मांग- जबरन धर्मांतरण को अलग अपराध दर्ज किया जाए

कानून का भय न होना और दोषियों को मिलने वाली छूट इस कुप्रथा को बढ़ावा दे रही है। UN ने पाकिस्तान सरकार से मांग की है कि जबरन धर्मांतरण को एक अलग अपराध के रूप में दर्ज किया जाए और पूरे देश में विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष कर दी जाए। यह समस्या पाकिस्तान के अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदू परिवारों के लिए लंबे समय से चली आ रही चुनौती है। सिंध प्रांत में हिंदू आबादी काफी है, लेकिन यहां सुरक्षा और कानूनी मदद की कमी ने स्थिति और बिगाड़ दी है।

पाकिस्तान में कानून सुधार करने की मांग

विशेषज्ञों का कहना है कि यह व्यवस्थागत भेदभाव का हिस्सा है, जिसमें गैर-मुस्लिम महिलाओं और लड़कियों को जबरन इस्लाम अपनाने और मुस्लिम पुरुषों से शादी के लिए मजबूर किया जाता है। UN ने पाकिस्तान सरकार से तत्काल संस्थागत और कानूनी सुधार की मांग की है। इसमें पुलिस सुधार, निष्पक्ष जांच, पीड़ितों को सुरक्षा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई शामिल है। बिना किसी देरी के प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है, वरना यह मानवाधिकार उल्लंघन का सिलसिला जारी रहेगा।