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Ajit Pawar Plane Crash: क्या होता है ‘रीडबैक’ जिसकी वजह से अजित पवार का विमान हुआ क्रैश

Ajit Pawar Leatest News: हादसे से 12 मिनट पहले विमान ने ADS-B रेडियो सिग्नल भेजना बंद कर दिया था, जो आमतौर पर विमान की गति और लोकेशन की जानकारी देता है।

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भारत

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Ashib Khan

Jan 28, 2026

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विमान हादसे में अजित पवार की हुई मौत (photo-IANS)

Ajit Pawar plane crash Baramati: महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा एक चार्टर्ड निजी विमान बुधवार सुबह बारामती एयरपोर्ट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस भीषण हादसे में विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गई।

विमान ने सुबह 8:10 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी और सामान्य परिस्थितियों में इसे करीब 45 मिनट में बारामती पहुंचना था। लेकिन सुबह 8:46 बजे, एयरपोर्ट के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में यह विमान रनवे से करीब 100 फीट पहले क्रैश होता दिखाई दिया।

वहीं हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि हादसे से 12 मिनट पहले विमान ने ADS-B रेडियो सिग्नल भेजना बंद कर दिया था, जो आमतौर पर विमान की गति और लोकेशन की जानकारी देता है।

‘रीडबैक’ न देना बना चिंता का विषय

नागरिक उड्डयन मंत्रालय की ओर से जारी बयान में हादसे से पहले की घटनाओं का जिक्र किया गया है। इसमें एक अहम और चिंताजनक बिंदु सामने आया कि पायलट ने लैंडिंग क्लीयरेंस का ‘रीडबैक’ नहीं दिया।

क्या होता है ‘रीडबैक’?

SKYbrary के मुताबिक, ‘रीडबैक’ का मतलब है—एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) द्वारा दिए गए निर्देशों को पायलट द्वारा दोहराकर यह पुष्टि करना कि संदेश सही तरीके से समझ लिया गया है।

यह प्रक्रिया इसलिए जरूरी होती है ताकि पायलट और ATC के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी न रहे। खासकर लैंडिंग के दौरान ‘रीडबैक’ बेहद अहम होता है क्योंकि इससे यह स्पष्ट होता है कि:

1- कौन सा रनवे इस्तेमाल किया जाना है

2- मौसम की स्थिति क्या है

3- रनवे या आसपास किसी अन्य विमान या गतिविधि की स्थिति क्या है।

क्यों जरूरी है ‘रीडबैक’?

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर पायलट ATC के निर्देशों को सही तरह से नहीं समझता या उसे दोहराकर कन्फर्म नहीं करता, तो छोटी-सी चूक भी बड़े हादसे में बदल सकती है।

SKYbrary के मुताबिक, जिन निर्देशों का ‘रीडबैक’ जरूरी होता है, उनमें शामिल हैं:

  • रूट क्लीयरेंस
  • रनवे पर उतरने या उड़ान भरने की अनुमति
  • ऊंचाई, गति और दिशा से जुड़े निर्देश
  • किसी भी तरह के कंडीशनल क्लीयरेंस

ATC की भी जिम्मेदारी होती है कि वह पायलट द्वारा दिए गए ‘रीडबैक’ को सुने और अगर कोई गलती हो तो तुरंत सुधार करे।