
गृह मंत्री अमित शाह (X)
Naxalism End India: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर पहुंचे थे। यह उनका वो पहला दौरा था, जो उन्होंने देश से वामपंथी उग्रवाद को जड़ से खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 की जो आखिरी डेडलाइन तय की थी, उसके पूरा होने के बाद हुआ। शाह के इस ऐतिहासिक ऐलान के साथ ही भारत के माथे से दशकों पुराना नक्सलवाद का कलंक हमेशा के लिए मिट गया है। इस भव्य कार्यक्रम में नक्सल विरोधी ऑपरेशन्स में शामिल सुरक्षा बलों के जांबाज जवान और उग्रवाद की हिंसा में शहीद हुए जवानों व आम नागरिकों के पीड़ित परिवार मौजूद थे।
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि 'बस्तर के लिए यह बहुत बड़ा दिन है। आज यहां खड़ा रहकर सीना तन के कह सकता हूं भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। इस कामयाबी का सारा क्रेडिट हमारे सिक्योरिटी फोर्सेस को जाता है, और मैं आपके सामने सिर झुकाता हूं। यह एक सपना था, एक ऐसा सपना जिसके लिए हजारों जवानों ने इसे हकीकत में बदलने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।' इसके तुरंत बाद तीन पीढ़ियों के दर्द और जवानों के पराक्रम को याद करते हुए अमित शाह ने कहा 'साल 1971 से 2026 तक, जनता ने एक बुरे सपने जैसा कष्ट भोगा। बहुत खून-खराबा हुआ। तीन पीढ़ियां बर्बाद हो गईं। मुझे बहुत खुशी है कि हमारे बहादुर सैनिकों ने तीन से चार सालों में ही हमारा लक्ष्य हासिल कर लिया।.
अमित शाह ने कहा 'इस बड़ी कामयाबी के पीछे सुरक्षा बलों का हाथ है, जिसका नतीजा यह हुआ कि सैकड़ों माओवादी ढेर कर दिए गए और प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेताओं समेत सैकड़ों ने सरेंडर कर दिया। शाह ने याद दिलाया कि 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे, तब देश के सामने जम्मू-कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और नक्सलवाद की तीन बड़ी सुरक्षा चुनौतियां थीं, लेकिन आज भारत इन तीनों से मुक्त होकर विकास की राह पर है।
गृह मंत्री ने अब बस्तर के लिए अगले 5 साल का एक नया और बेहद महत्वाकांक्षी टारगेट सेट कर दिया है। उन्होंने एलान किया कि बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाया जाएगा। इसके लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के 70 कैंप अब सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि विकास के 'वन-स्टॉप सेंटर' के रूप में काम करेंगे, जहां से आदिवासियों को 370 सरकारी योजनाओं का सीधा फायदा मिलेगा।
इसी बीच, अमित शाह ने आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों से हुई बातचीत का एक बेहद दर्दनाक सच भी जनता के सामने रखा। उन्होंने कहा कि मैंने उनसे पूछा कि वे नक्सलवाद में कैसे शामिल हुए। उन्होंने बताया कि जब हम तीसरी कक्षा में पढ़ रहे थे, तब वे हम सभी को अपने साथ ले गए थे। उनकी जिंदगी तबाह हो गई।' नक्सलियों के खौफ की वजह से ही बस्तर के अंदरूनी इलाकों में आदिवासियों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी, 7 किलो फ्री चावल, सरकारी नौकरियों में 15% आरक्षण और बुनियादी शिक्षा जैसी सुविधाएं कभी मिल ही नहीं पाईं। अब मुख्यधारा में लौटे 3,000 पूर्व नक्सलियों को शिक्षित और हुनरमंद बनाने के लिए सरकार 20 करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है।
भाषण के अंत में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और सीआरपीएफ के एलीट कोबरा कमांडोज की बहादुरी को सलाम करते हुए शाह ने कहा विकसित भारत का सपना बस्तर के बिना अधूरा है। अमित शाह ने कड़े शब्दों में कहा कि 'मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि एक विकसित बस्तर के बिना, एक विकसित भारत का सपना अधूरा है। मैं पूरे विश्वास के साथ कहता हूं कि अब नक्सलवाद का अंत हो चुका है, और पिछले 50 सालों में हुए नुकसान की भरपाई करना राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। हम अगले कुछ सालों में इस नुकसान की भरपाई करेंगे और बस्तर को विकसित करने के सपने को पूरा करेंगे। तब तक, हम यह नहीं मानेंगे कि हमारा लक्ष्य पूरा हो गया है।'
Updated on:
18 May 2026 09:17 pm
Published on:
18 May 2026 09:14 pm
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