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पूर्व CM विजयन के साथ विद्रोह करने वाले को कांग्रेस ने दी बड़ी जिम्मेदारी, अब केरल में CPI(M) के सामने नया संकट

Sudhakaran pro tem speaker: केरल में बड़ा सियासी ट्विस्ट सामने आया है। पूर्व सीएम पी विजयन को अब विद्रोही नेता जी सुधाकरन के सामने शपथ लेनी पड़ सकती है।

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Rajasthan Congress - File PIC

कांग्रेस के लिए इस्तेमाल की गई सांकेतिक तस्वीर। (फाइल फोटो- पत्रिका)

केरल की राजनीति में एक नया ड्रामा शुरू हो गया है। सीपीआई(एम) के दिग्गज नेता पी. विजयन, जो हाल ही में चुनावी हार झेल चुके हैं, अब अपने ही पुराने साथी जी सुधाकरन के सामने शपथ लेने की स्थिति में पहुंच गए हैं। कांग्रेस की नई सरकार के पहले फैसले ने पूरे विपक्ष को चौंका दिया है।

पुराने साथी का बदला स्वाद

विजयन के लिए यह फैसला सिर्फ प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक चोट है। वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद अपने पहले कैबिनेट बैठक में फैसला लिया कि अम्बलप्पुझा से निर्दलीय जीतने वाले जी सुधाकरन को 16वीं केरल विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर बनाया जाए।

21 मई को नई विधानसभा की पहली बैठक

21 मई को जब नई विधानसभा की पहली बैठक होगी, तब सुधाकरन ही नए विधायकों को शपथ दिलाएंगे। सुधाकरन लंबे समय तक सीपीआई(एम) के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। लेकिन पार्टी नेतृत्व, खासकर विजयन के रवैये से नाराज होकर उन्होंने विद्रोह कर दिया।

पार्टी टिकट न मिलने पर वे निर्दलीय लड़े और जीत गए। उनकी जीत को पार्टी के अंदर लोकतंत्र की कमी और विजयन के एकछत्र शासन के खिलाफ बड़ा विरोध माना जा रहा है।

क्या विजयन लेंगे शपथ सुधाकरन के सामने?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजयन 21 मई को सुधाकरन के सामने शपथ लेंगे? राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह उनके लिए बहुत शर्मिंदगी भरा पल होगा। सूत्रों के मुताबिक, विजयन पहले दिन की बैठक से दूर रह सकते हैं और 22 मई को स्थायी स्पीकर के सामने शपथ लेंगे। नियमों के मुताबिक यह संभव है।

पार्टी के अंदर भी तेज आलोचना

यह घटना विजयन के लिए आसान समय पर नहीं आई है। चुनाव हार के बाद सीपीआई(एम) की जिला कमेटी बैठक में उनके और कुछ नेताओं की खुलकर आलोचना हो रही है। पार्टी कार्यकर्ता पूछ रहे हैं कि आखिर आंतरिक लोकतंत्र कहां गया?

ऐसे में सुधाकरन को यह महत्वपूर्ण पद मिलना पार्टी के लिए और झटका है। सतीशन सरकार ने इस कदम से शुरुआत में ही विपक्ष को बैकफुट पर धकेल दिया है।

प्रोटेम स्पीकर का पद आमतौर पर सबसे सीनियर विधायक को मिलता है, लेकिन इस बार इसमें साफ तौर पर राजनीतिक संदेश छिपा है।

विपक्ष पर दबाव, सत्ता पक्ष को फायदा

सुधाकरन का विद्रोह और उनकी जीत पहले से ही सीपीआई(एम) के लिए मुश्किल बनी हुई थी। अब प्रोटेम स्पीकर बनने के बाद 21 मई को होने वाली शपथ ग्रहण समारोह पूरी तरह से प्रतीकात्मक हो गया है। यह केरल की राजनीति में विजयन युग के कमजोर पड़ने का संकेत माना जा रहा है।