
कथित बैंक घोटाले की जांच के बीच अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर बिना अनुमति देश न छोड़ने का वचन दिया। (Photo - IANS)
केंद्रीय एजेंसियों को कथित बड़े बैंक घोटाले की जांच में देरी के लिए फटकार लगाने के दो सप्ताह बाद रिलायंस कम्युनिकेशंस और समूह की कंपनियों से जुड़े मामले में पूर्व प्रमोटर Anil Ambani ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। हलफनामे में उन्होंने कहा है कि अदालत की पूर्व अनुमति के बिना वे देश नहीं छोड़ेंगे।
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में अंबानी ने कहा कि संबंधित कंपनियों में उनकी भूमिका केवल गैर-कार्यकारी निदेशक (Non-Executive Director) की थी और वे कंपनियों के दैनिक प्रबंधन या संचालन में शामिल नहीं थे।
यह हलफनामा 4 फरवरी के उस आदेश के बाद आया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) द्वारा सार्वजनिक धन की कथित हेराफेरी की जांच की रफ्तार पर चिंता जताई थी। अदालत ने केंद्र और एजेंसियों को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि अंबानी देश न छोड़ें। उनके वकील Mukul Rohatgi ने भी आश्वासन दिया था कि वे अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करेंगे।
हलफनामे में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 50 के तहत चल रही जांच का हवाला देते हुए कहा गया कि उनके द्वारा दिया गया कोई भी सहयोग या सामग्री पहले से विचाराधीन मामलों के संदर्भ में ही समझी जानी चाहिए।
पीठ ने यह भी कहा था कि स्वीकृति (सैंक्शन) जैसी प्रक्रियात्मक आपत्तियों को जांच में बाधा बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब धन की हेराफेरी और संभावित मिलीभगत के संकेत हों। अदालत ने एजेंसियों को निष्पक्ष, त्वरित और बिना किसी भय या पक्षपात के कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
यह कार्यवाही सेवानिवृत्त नौकरशाह EAS Sarma द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) से संबंधित है। याचिका में रिलायंस समूह की विभिन्न कंपनियों से जुड़े कथित घोटाले की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता Prashant Bhushan और Pranav Sachdeva ने पैरवी की।
इससे पहले ED ने अदालत में दाखिल हलफनामे में कई कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर डिफॉल्ट का खुलासा किया था। उसके अनुसार, रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड ने 33 ऋणदाताओं से ₹7,523.46 करोड़ के ऋण पर कथित चूक की। रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड ने 21 ऋणदाताओं से ₹8,226.05 करोड़ के ऋण पर डिफॉल्ट किया। रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) और उसकी समूह कंपनियों के मामले में ₹40,000 करोड़ से अधिक की बकाया राशि को कथित अपराध की आय का हिस्सा बताया गया।
ED ने अब तक तीन Enforcement Case Information Reports (ECIR) दर्ज की हैं और गिरफ्तारियां भी की हैं। CBI को संस्थागत मिलीभगत की जांच कर मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह जांच की करीबी निगरानी जारी रखेगा।
Updated on:
19 Feb 2026 02:18 pm
Published on:
19 Feb 2026 02:16 pm
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