
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (सोर्स: ANI और केजरीवाल एक्स अकाउंट स्क्रीनशॉट)
Arvind Kejriwal Meta Account Ban Updates: आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि उनका Meta अकाउंट बैन कर दिया गया है। उन्होंने मेटा पर बड़ा आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर कहा कि आखिर क्यों उनका Meta अकाउंट प्रतिबंधित किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधा है।
केजरीवाल ने Meta और Meta India को टैग करते हुए लिखा कि उन्हें जानकारी मिली है कि उनका 'Instagram' अकाउंट भारत में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर अकाउंट पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया। कंपनी का कोई अधिकारी इसकी वजह नहीं बता रहा है। यह भी नहीं बताया जा रहा कि यह प्रतिबंध कैसे हटेगा?
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि उन्होंने इस मामले में कई ईमेल भेजे हैं। लेकिन हर बार सिर्फ औपचारिक जवाब मिला। उनकी शिकायत का कोई स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया। उन्होंने Meta की सेवा को बेहद खराब बताया।
केजरीवाल ने अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा- ‘हमारे प्रधानमंत्री के सामने इतना मत झुको। वरना वह आपको भारत में सिर्फ अपना ही अकाउंट चलाने की इजाजत देंगे।'
वहीं बीते कल खबर आई थी कि मेटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट पर कुछ समय के लिए लगी रोक को अपनी गलती मानते हुए माफी मांग ली है। कंपनी के मुख्य वैश्विक मामलों के अधिकारी जोएल कैपलन ने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के दौरान इस गलती पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की पोस्ट पर लगी रोक तकनीकी या संचालन संबंधी गलती थी और इसके लिए कंपनी माफी मांगती है।
बता दें मेटा का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को आईटी मंत्री से मिला। इससे पहले कंपनी के अधिकारियों ने सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन से भी बातचीत की। बैठक में मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई कुछ कमियों को स्वीकार किया।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग ने भी प्लेटफॉर्म पर आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री के प्रसार से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई और हुई गलतियों पर अफसोस व्यक्त किया।
सरकार ने मेटा को साफ कहा कि यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यह तय करता है कि कौन-सा कंटेंट किसे दिखाया जाए, तो उसे पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता। ऐसी स्थिति में उसे सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मिलने वाला सेफ हार्बर यानी कानूनी सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
Updated on:
06 Aug 2026 12:03 pm
Published on:
06 Aug 2026 11:32 am
