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‘2 दिन पहले पद छोड़ने को कहा’, राज्यसभा का ऑफर ठुकराने के बाद सिद्धारमैया ने सोनिया-राहुल गांधी को भेजा खास मैसेज

Karnataka Congress leadership Change: सिद्दारमैया ने CM पद से इस्तीफा देते हुए भावुक बयान दिया। उन्होंने कहा- आखिरी सांस तक राजनीति में रहूंगा। सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ाई जारी रखूंगा।

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Siddaramaiah

राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ सिद्दारमैया। (फोटो- IANS)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद सिद्दारमैया ने गुरुवार को जो बयान दिया, उससे साफ है कि वह शांत नहीं बैठने वाले हैं। उन्होंने खुलकर यह ऐलान कर दिया कि वह अभी राजनीति से अलग नहीं होंगे।

उन्होंने कहा- मैं अपनी आखिरी सांस तक राजनीति में रहूंगा। सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ लड़ता रहूंगा क्योंकि वे संविधान के खिलाफ हैं। लोक भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिद्दारमैया काफी भावुक नजर आए।

आंखों में नमी के साथ उन्होंने याद किया कि अगर संविधान न होता तो आज वे चरवाहे से आगे नहीं बढ़ पाते। शिक्षा नहीं मिलती और न ही मंत्री या मुख्यमंत्री बन पाते।

कांग्रेस हाई कमान को भेजा खास मैसेज

राज्यसभा का ऑफर ठुकराने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को खास संदेश भेजा। सिद्दारमैया ने सभी को विशेष धन्यवाद दिया।

उन्होंने पुरानी बात याद करते हुए कहा कि जब उन्हें जेडीएस से निकाला गया था और वे अहिंदा आंदोलन चला रहे थे, तब अहमद पटेल की मदद से सोनिया गांधी से मुलाकात हुई।

उसी के बाद 2006 में वे कांग्रेस में शामिल हुए। उस समय खड़गे कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष थे। सिद्धारमैया ने कहा- मैंने कभी अपने मूल्यों से समझौता नहीं किया। पानी, जमीन और भाषा के मुद्दे पर हमेशा कर्नाटक का पक्ष लिया।

संविधान ही मेरा धर्म, मतदाता ही भगवान

प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिद्दारमैया ने अपने राजनीतिक सफर के बारे में बताया। उन्होंने कहा- कन्नड़ फिल्मों के राजकुमार अपने फैंस को भगवान कहते थे, लेकिन मेरे लिए मतदाता ही भगवान हैं। संविधान मेरा धर्म है।

उन्होंने बताया कि कर्नाटक के सात करोड़ लोगों की सेवा करने का मौका मिला। दो बार मुख्यमंत्री और दो बार विपक्ष के नेता के रूप में काम किया। गरीबों को भोजन, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं देने पर जोर दिया। सभी धर्म और समुदाय के गरीबों के लिए काम किया।

'दो दिन पहले पद छोड़ने को कहा गया था'

सिद्दारमैया ने राज्यपाल के सचिव को अपना इस्तीफा पत्र सौंप दिया। राज्यपाल थावरचंद गहलोत उस समय बेंगलुरु में नहीं थे, इसलिए सचिव को सौंपना पड़ा। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले ही हाईकमान ने पद छोड़ने को कहा था और उन्होंने अपना वादा पूरा कर दिया।

उन्होंने भरोसा जताया कि राज्यपाल आज रात लौटकर इस्तीफा स्वीकार कर लेंगे। सिद्दारमैया ने कहा कि कांग्रेस के पास 138 विधायकों का समर्थन है और पूर्ण बहुमत है। अब राज्यपाल को नया मुख्यमंत्री बनाने का मौका देना चाहिए।