
कांग्रेस ने असम सरकार पर लगाए आरोप (Photo-IANS)
Pranab Doley NSA Detention Assam: असम में किसान नेता प्रणब डोले को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने को लेकर कांग्रेस ने हिमंत सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया किसरकार असहमति की आवाजों को दबाने के लिए असाधारण और कड़े कानूनों का इस्तेमाल कर रही है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है।
उन्होंने कहा कि असम सरकार ने 30 जुलाई को डोले के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू किया, जबकि इससे एक दिन पहले ही एक जिला अदालत ने उन्हें जमानत दी थी। उन्होंने लिखा- यह निवारक हिरासत कानूनों का खुला दुरुपयोग और राज्य सरकार की हद से बाहर की कार्रवाई है।
अपनी पोस्ट में कांग्रेस नेता ने कहा कि डोले को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा होटल परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों के विरोध का समर्थन करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। डोले लंबे समय से इस परियोजना के विरोध में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।
जयराम रमेश ने दावा किया कि गोलाघाट के स्थानीय और आदिवासी निवासी वर्ष 2022 से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर गुवाहाटी हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परियोजना के लिए उनकी जमीन जबरन अधिग्रहित की गई है।
रमेश के अनुसार, 29 जुलाई को डोले को जमानत देते हुए सत्र अदालत ने कहा था कि जहां पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदाय के अस्तित्व का सवाल आपस में जुड़ा हो, वहां स्थानीय लोगों की जायज चिंताओं को दबाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इसके ठीक बाद डोले पर NSA लगाना इसी तरह की चिंताओं को दबाने की कोशिश है।
जयराम रमेश ने दावा किया कि डोले की NSA हिरासत के आदेश में संदिग्ध विदेशी लेन-देन और संदिग्ध स्रोतों से धन प्राप्त करने जैसे अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र की मोदी सरकार से जुड़ी पुरानी पटकथा जैसा है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि डोले पर NSA लगाया जाना भाजपा शासित राज्यों में असहमति की आवाजों को दबाने के लिए कठोर कानूनों के कथित इस्तेमाल के बढ़ते पैटर्न का हिस्सा है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि निवारक हिरासत कानूनों का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को जमानत मिलने के बाद न्यायिक आदेश को निष्प्रभावी करने या उसकी हिरासत को महज लंबा खींचने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि असम सरकार की कार्रवाई कानून के शासन और लोकतांत्रिक असहमति के प्रति उसके रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रणब डोले को 13 जुलाई को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया था और बाद में उन्हें गोलाघाट जिला जेल में रखा गया। 29 जुलाई को एक अदालत ने जून में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में उन्हें जमानत दे दी थी।
हालांकि, इसके अगले ही दिन यानी 30 जुलाई को राज्य सरकार ने उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 1980 की धारा 3(2) के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी कर दिया। इसके चलते जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई नहीं हो सकी और उन्हें गोलाघाट जिला जेल में ही रखा गया।
Updated on:
02 Aug 2026 02:14 pm
Published on:
02 Aug 2026 02:14 pm
