
भरत भूषण तिवारी। (फोटो सोर्स - भरत भूषण तिवारी/फेसबुक)
Bharat Tiwari Encounter: इन दिनों बिहार के भोजपुर जिले के 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी के एनकाउंटर का मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है, जो अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस प्रकरण में एक जनहित याचिका (PIL) दायर कर सीबीआई जांच की मांग की गई है। वहीं, भरत भूषण तिवारी के परिवार ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मां आशा देवी और भाई चंदन तिवारी का आरोप है कि भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था लेकिन इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई।
भरत तिवारी की मां आशा देवी ने बेटे की मौत को लेकर गहरा दुख जताते हुए पुलिस अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, ''मेरे बेटे को दो गोलियां मारी गईं, वह बहुत अच्छा इंसान था, समाज सेवा कर रहा था और गरीबों का मसीहा था। उसे उसकी समाज सेवा की वजह से मारा गया।"
आशा देवी ने कहा कि उनके बेटे की कुछ मांगें थीं, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उन्होंने एक डीएसपी, एसपी को इस मामले के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मृतक के भाई चंदन तिवारी ने भी पूरे मामले पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि घटना के समय जो कुछ हुआ था वह सब लाइव था, जिसे सभी लोगों ने देखा है। चंदन ने कहा, "हमें जांच से कोई मतलब नहीं है। जो लोग इसमें शामिल हैं उन्हें तुरंत जेल भेजा जाना चाहिए। सब कुछ सामने दिख रहा है।"
चंदन ने कहा, भरत तिवारी ने अपना हथियार फेंक दिया था और आत्मसमर्पण की स्थिति में थे। चंदन के मुताबिक, वहां मौजूद लोगों ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए कहा भी था लेकिन कुछ देर बाद उन्हें अलग ले जाया गया और फिर गोली मार दी गई।
अधिवक्ता विशाल तिवारी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि भरत भूषण तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और मामले की जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।
याचिका के अनुसार, 17 जून 2026 को हुई घटना से कुछ घंटे पहले भरत तिवारी फेसबुक लाइव पर आए थे। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि कुछ शर्तें पूरी होने पर वह आत्मसमर्पण करने को तैयार हैं। याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस ने पहले उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया था और सुरक्षित हिरासत में लेकर इलाज कराने की बात कही थी।
याचिका में भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी के हवाले से कहा गया है कि उनके बेटे के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और न ही कोई चार्जशीट लंबित थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि भरत ने अपना हथियार छोड़ दिया था और आत्मसमर्पण कर दिया था लेकिन इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की है। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह पहले मामले की लिस्टिंग के लिए रजिस्ट्रार के पास जाए।
याचिका में केवल भरत तिवारी मामले की जांच ही नहीं ही नहीं इसके साथ-साथ बिहार और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में कथित फर्जी एनकाउंटर और बढ़ते एनकाउंटर कल्चर पर भी चिंता जताई गई है। साथ ही कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच और एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई है।
Updated on:
22 Jun 2026 05:46 pm
Published on:
22 Jun 2026 05:46 pm
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