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लाल किला धमाके के पीड़ितों और आरोपी के बायोलॉजिकल अवशेष NIA करेगी डिस्पोज, कोर्ट के आदेश

Red Fort Explosion: लाल किला धमाका 2025 मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने NIA को घटनास्थल से मिले पीड़ितों और एक आरोपी उमर उन नबी के शरीर के जैविक हिस्सों को नष्ट करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने एनआइए से इसकी अनुपालना रिपोर्ट भी मांगी है।
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Terror Investigation

पटियाला हाउस कोर्ट, नई दिल्ली, photo- ANI

Red Fort Explosion: लाल किला धमाका 2025 मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने NIA को घटनास्थल से मिले पीड़ितों और एक आरोपी उमर उन नबी के शरीर के जैविक हिस्सों को नष्ट करने की अनुमति दी है। कोर्ट ने एनआइए से इसकी अनुपालना रिपोर्ट भी मांगी है। कोर्ट के निर्देशानुसार जैविक हिस्सों को पूरी गरिमा और उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार डिस्पोज किया जाएगा।

एनआइए ने मांगी थी अनुमति

कोर्ट में सुनवाई के दौरान, NIA ने बताया कि इन जैविक हिस्सों से फोरेंसिक सबूत इकट्ठा कर लिए गए हैं और अब इन्हें रखने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि अब यह प्राकृतिक रूप से खराब हो रहे हैं। जांच एजेंसी ने 11 नवंबर 2025 को हुए रेड फोर्ट धमाके के मृतकों और आरोपी के शरीर के जैविक हिस्सों को नष्ट करने की अनुमति मांगी थी। वहीं NIA ने दिल्ली रेड फोर्ट धमाके में मारे गए लोगों के शरीर के हिस्सों के संबंध में फोरेंसिक रिपोर्ट दाखिल की थी। NIA पहले ही डॉ. शाहीन सईद और अन्य सहित 10 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में मुख्य चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।

बड़ी जिहादी साजिश का आरोप

NIA ने इसे एक बड़ी जिहादी साजिश का आरोप लगाया है, जिसमें मेडिकल प्रोफेशनल्स समेत कट्टरपंथी सोच वाले लोग शामिल थे, जो कथित तौर पर AQIS/AGuH की विचारधारा से प्रेरित थे। जांचकर्ताओं का दावा है कि आरोपियों ने 2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक के दौरान इस संगठन को 'गजवत-उल-हिंद' के तौर पर संगठित किया था।

एनआइए के अनुसार आरोपियों ने ऑपरेशन हेवनली हिंद नाम का एक ऑपरेशन शुरू किया था, जिसका मकसद लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को गिराना और शरिया कानून लागू करना था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर सदस्य भर्ती किए, चरमपंथी विचारधारा फैलाई, हथियार और गोला-बारूद जमा किए और आसानी से मिलने वाले केमिकल का इस्तेमाल करके विस्फोटक तैयार किए।

ट्रायसीटोन ट्राइपरॉक्साइड विस्फोटक की पुष्टि

NIA का दावा है कि धमाके में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक पदार्थ 'ट्रायसीटोन ट्राइपरॉक्साइड' (TATP) था, जिसे कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि प्रतिबंधित हथियारों की गैर-कानूनी खरीद, साथ ही सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के लिए रॉकेट और ड्रोन पर आधारित हथियारों के इस्तेमाल की भी प्लानिंग थी। एजेंसी के अनुसार वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच में DNA फिंगरप्रिंटिंग और आवाज का विश्लेषण रिपोर्ट के आधार पर मृत आरोपी की पहचान की पुष्टि हुई है।

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