
बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन (फोटो- आईएएनएस)
विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन में दरार की अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी द्रविड मुनेत्र कषगम (DMK) ने 8 जून को होने वाली गठबंधन बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला लिया, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि गठबंधन अब केवल नाम भर का रह गया है और सहयोगी दलों का कांग्रेस पर भरोसा समाप्त हो चुका है। डीएमके ने अपने फैसले के पीछे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के प्रति कार्यकर्ताओं की नाराजगी को प्रमुख वजह बताया है।
डीएमके के फैसले के बाद बीजेपी नेताओं ने विपक्षी एकता पर गंभीर सवाल उठाए। बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा कि INDIA गठबंधन पहले ही खत्म हो चुका है। यह केवल दिखावे का गठबंधन है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के सहयोगी दल कांग्रेस पर भरोसा नहीं कर रहे हैं और सभी दल अपने-अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं। बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि डीएमके को अब जाकर कांग्रेस की राजनीति की वास्तविकता समझ आई है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि विपक्षी दलों के बीच लगातार बढ़ रही असहमति गठबंधन को कमजोर कर रही है।
डीएमके ने बयान जारी कर कहा कि पार्टी को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण मिला था, लेकिन उसने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए दूरी बनाने का निर्णय लिया। पार्टी के अनुसार हालिया तमिलनाडु राजनीतिक घटनाक्रम के बाद कांग्रेस को लेकर संगठन के भीतर असंतोष बढ़ा है। वहीं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि डीएमके शुरू से ही परिसीमन जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ मजबूती से खड़ी रही है। उन्होंने कहा कि कौन आएगा और कौन नहीं आएगा, इस पर अटकलों की जरूरत नहीं है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन अभी पूरी तरह सक्रिय है और विपक्षी दल संवाद बनाए हुए हैं।
जहां बीजेपी लगातार INDIA गठबंधन को टूटता हुआ बता रही है, वहीं कई विपक्षी दलों ने इसे सामान्य राजनीतिक मतभेद करार दिया। शिवसेना-यूबीटी नेता संजय राउत ने कहा कि गठबंधन अभी भी मजबूत है और डीएमके को धैर्य रखना चाहिए था। एमडीएमके नेता दुरई वाइको ने भी कहा कि उनकी पार्टी अभी INDIA गठबंधन का हिस्सा बनी हुई है। जम्मू-कश्मीर नेशनल कांफ्रेंस (JKNC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी 8 जून की बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार उभरते मतभेद विपक्षी रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकजुटता महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Published on:
05 Jun 2026 05:54 pm
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