बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि एक व्यक्ति का वैध जाति प्रमाण पत्र पितृसत्तात्मक यानी उनके रिश्तेदार की सामाजिक स्थिति के निर्णायक प्रमाण के रूप में होगा। दरअसल बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में ठाणे निवासी भरत तायडे की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान ये फैसला दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का वैध जाति प्रमाण पत्र उसके पिता के जाति के आधार पर ही होगा। जस्टिस एसबी शुक्रे और जीए सनप की खंडपीठ ने ये फैसला सुनाया। बता दें कि, पितृसत्तात्मक ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जिसमें जीवन के हर क्षेत्र के संबंध में फैसला लेने का एकमात्र अधिकार पुरुषों को होता है।