
PM मोदी बीच में बायीं ओर पुतिन और दाहिनी तरफ शी जिनपिंग (फोटो - आईएएनएस)
BRICS Summit 2026 and PM Modi: नई दिल्ली में चल रहे BRICS शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन की बढ़ती ताकत और प्रभाव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि BRICS के प्रति दुनिया का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। सदस्य देशों के बीच सहयोग और समर्थन ने साझा सोच को जीत-जीत वाले सहयोग में बदल दिया है। PM मोदी ने रविवार को ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करना’ विषय पर BRICS सत्र की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि BRICS अब अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास के अलग-अलग अनुभवों वाले देशों को एक साथ ला रहा है।
PM मोदी ने कहा कि BRICS की ताकत, प्रभाव और स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने संगठन के विस्तार का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, BRICS परिवार में अब अलग-अलग क्षेत्रों और विकास यात्राओं वाले देश शामिल हैं। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है। भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान चार प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान दिया है। इनमें लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता शामिल हैं।
PM मोदी ने कहा कि दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर आम लोगों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है। महामारी, जलवायु से जुड़ी आपदाएं और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें दिखाती हैं कि आज कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता।
भारत ने BRICS की अध्यक्षता के दौरान संकट से पहले तैयारी पर खास जोर दिया है। इसी दिशा में सदस्य देशों के बीच संक्रामक बीमारियों की पहचान और उनसे निपटने के लिए शुरुआती चेतावनी व्यवस्था पर सहमति बनी है। इस व्यवस्था का उद्देश्य किसी बीमारी के तेजी से फैलने से पहले उसके संकेतों को पहचानना और सदस्य देशों के बीच जरूरी जानकारी साझा करना है। इससे महामारी के समय बेहतर तैयारी और तेज प्रतिक्रिया में मदद मिल सकती है।
BRICS देशों ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया है। इसके लिए शुरुआती चेतावनी से जुड़े आंकड़ों को आपस में जोड़ने के लिए दिशानिर्देश तैयार किए गए हैं। इससे अलग-अलग देशों को आपदा के संभावित खतरे की जानकारी समय रहते मिल सकेगी। इसके साथ ही बचाव और राहत की तैयारी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
PM मोदी ने वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूत बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। महामारी और दूसरे वैश्विक संकटों के दौरान सप्लाई चेन में रुकावटों का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ा था। BRICS के तहत लॉजिस्टिक सप्लाई कोऑपरेशन फ्रेमवर्क तैयार किया गया है। इसका मकसद सप्लाई चेन को ज्यादा भरोसेमंद और संकट के समय ज्यादा मजबूत बनाना है।
PM मोदी ने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया के किसी एक हिस्से में पैदा हुआ संकट दूसरे क्षेत्रों को भी प्रभावित कर सकता है। महामारी से लेकर प्राकृतिक आपदाओं और सप्लाई चेन में रुकावट तक, इनका असर कई देशों तक पहुंचता है। इसी वजह से उन्होंने BRICS देशों के बीच बेहतर तालमेल और साझा तैयारी की जरूरत बताई। भारत की अध्यक्षता में इन मुद्दों को संगठन के एजेंडे में प्रमुख जगह दी गई है।
इस साल BRICS की भारतीय अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। यानी संगठन को संकटों के सामने ज्यादा मजबूत बनाना, नए विचारों और तकनीक को बढ़ावा देना, देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और टिकाऊ विकास पर ध्यान देना। नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को हो रहे शिखर सम्मेलन में इन मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच चर्चा हो रही है। सम्मेलन के पहले दिन PM मोदी ने कई वैश्विक नेताओं के साथ मुलाकात की। दूसरे दिन भी उन्होंने BRICS के भविष्य और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में संगठन की भूमिका पर जोर दिया।
BRICS की बैठक के दौरान PM मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत अन्य नेताओं ने भारत मंडपम में परिवार फोटो भी खिंचवाई। तस्वीर में PM मोदी बीच में और उनके दोनों ओर पुतिन और शी जिनपिंग नजर आए। भारत का जोर इस बात पर है कि BRICS केवल बातचीत का मंच न रहे, बल्कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस सहयोग और व्यावहारिक कदमों का मंच भी बने। महामारी, आपदा और सप्लाई चेन से जुड़े नए तंत्र इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं।
Updated on:
13 Sept 2026 12:48 pm
Published on:
13 Sept 2026 12:48 pm
