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Three-Language Policy: CBSE ने दूर किया भ्रम, 7वीं, 8वीं और 9वीं के छात्रों को मिली बड़ी राहत

CBSE ने तीन-भाषा नीति को लेकर बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। 7वीं, 8वीं और 9वीं के वे छात्र जिन्होंने दो विदेशी भाषाएं चुनी हैं, वे 10वीं तक अपना मौजूदा विषय संयोजन जारी रख सकेंगे। जानिए शिक्षा मंत्रालय ने क्या कहा।
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CBSE Language Policy

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Photo- IANS)

CBSE Foreign Languages Policy: सीबीएसई के वे स्टूडेंट्स जो अभी 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ रहे हैं और जिन्होंने तीन भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाएं चुनीं हैं, उनके लिए राहत भरी खबर आई है। दरअसल, ऐसे स्टूडेंट्स के लिए क्लास 10वीं तक वहीं सब्जेक्ट कॉम्बिनेशन जारी रखने की इजाजत दी जाएगी। यह जानकारी ANI ने शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से दी है। यह सफाई मई में जारी CBSE के एक सर्कुलर के कुछ हफ्ते बाद आई है।

सर्कुलर में कहा गया था कि 1 जुलाई से क्लास 9 में आने वाले स्टूडेंट्स को नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के हिसाब से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। इस सर्कुलर का स्टूडेंट्स और पेरेंट्स ने विरोध किया था। कई पिटीशनर्स ने इस कदम को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

ANI सूत्रों के मुताबिक, तीन-भाषा नीति के तहत कम से कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की जरूरत कक्षा 6 से लागू होगी और यह क्लास 7वीं, 8वीं और 9वीं में पहले से पढ़ रहे स्टूडेंट्स पर पिछली तारीख से लागू नहीं होगी। हालांकि, सरकार ने इस बात को खारिज कर दिया कि नई सफाई पॉलिसी को वापस लेने जैसा है।

'नियम पहले से ही था, क्लैरिटी नहीं थी'

पॉलिसी को वापस लेने के सवाल पर शिक्षा मंत्रालय के एक सीनियर सूत्र ने कहा, यह पीछे हटना नहीं है। यह नियम पहले से ही था; बस यह काफी साफ नहीं था। काफी क्लैरिटी नहीं थी। यह बस वह क्लैरिटी देने के लिए है।'

इसका कारण बताते हुए, सूत्र ने कहा कि हर साल लगभग 24 लाख स्टूडेंट्स CBSE क्लास 10वीं की परीक्षा देते हैं। इनमें से लगभग 30,000 छात्र ही विदेशी भाषाएं चुनते हैं। सूत्र ने कहा, CBSE के लगभग 98.5 प्रतिशत स्टूडेंट्स पहले से ही तीन-भाषा फॉर्मूला अपना रहे हैं। यह मुद्दा स्टूडेंट्स के एक बहुत छोटे ग्रुप से जुड़ा है, जो ज्यादातार शहरी और मेट्रोपॉलिटन इलाकों में हैं, जिनमें से कुछ ने दो विदेशी भाषाएं चुनी थीं। हम इन खास मामलों के लिए छूट दे रहे हैं। क्लैरिफिकेशन को शामिल करते हुए फॉर्मल ऑर्डर जल्द ही जारी होने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से किया था इनकार

आपको बता दें कि यह क्लैरिफिकेशन सुप्रीम कोर्ट के उस पिटीशन पर अंतरिम राहत देने से इनकार करने के एक हफ्ते बाद आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 2026-27 एकेडमिक सेशन से क्लास 9 के स्टूडेंट्स के लिए CBSE की तीन-भाषा पॉलिसी को लागू करने को चुनौती देने वाली पिटीशन पर अंतरिम राहत देने से मना कर दिया गया था।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने पॉलिसी पर रोक लगाने से मना कर दिया। इसके साथ ही निर्देश दिया कि इस पिटीशन को कोर्ट में पहले से पेंडिंग इसी तरह की पिटीशन के साथ टैग किया जाए।

यह विवाद CBSE के मई के सर्कुलर से शुरू हुआ था, जिसमें नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क के भाषा प्रोविजन को लागू किया गया था, जिसके तहत 2026-27 एकेडमिक सेशन से क्लास IX में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को कम से कम दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाएं पढ़नी ज़रूरी थीं। इस कदम से उन स्टूडेंट्स में चिंता बढ़ गई थी, जिन्होंने पहले के फ्रेमवर्क के तहत पहले ही दो विदेशी भाषाएं चुन ली थीं।