
CBSE Re-evaluation 2026 (AI Image)
CBSE Re-evaluation 2026: सीबीएसई के नए डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) को लेकर छात्रों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। 12वीं के रिजल्ट जारी होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया तक पहुंच गया है। कई छात्रों का आरोप है कि उनकी आंसर शीट या तो धुंधली स्कैन हुई हैं या फिर कई जवाबों को ठीक से चेक ही नहीं किया गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर छात्र लगातार स्क्रीनशॉट और शिकायतें साझा कर रहे हैं। किसी ने ब्लर कॉपी दिखाई, तो किसी ने दावा किया कि पूरे सवाल के जवाब लिखने के बावजूद नंबर नहीं दिए गए।
इस साल CBSE ने पहली बार बड़े स्तर पर ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम लागू किया है। इसके तहत छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करके डिजिटल तरीके से जांचा गया। बोर्ड का कहना था कि इससे मूल्यांकन ज्यादा तेज और पारदर्शी होगा, लेकिन रिजल्ट आने के बाद कई छात्रों ने कम नंबर मिलने पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
अब जब बोर्ड ने री-इवैल्यूएशन और स्कैन कॉपी देखने का विकल्प खोला, तब विवाद और बढ़ गया। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि स्कैन की गई कॉपियां इतनी धुंधली हैं कि खुद छात्र अपनी लिखावट तक नहीं पढ़ पा रहे हैं।
एक छात्र ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर कॉपी साफ दिखाई ही नहीं दे रही, तो एग्जामिनर ने जांच कैसे की होगी। इस तरह के सवाल अब लगातार उठ रहे हैं।
कई छात्रों ने यह भी दावा किया कि उनके कुछ जवाबों को चेक ही नहीं किया गया। खासकर फिजिक्स, मैथ्स, अकाउंटेंसी और इकोनॉमिक्स जैसे विषयों में स्टेप मार्किंग को लेकर शिकायतें ज्यादा सामने आई हैं।
कुछ छात्रों का कहना है कि उन्होंने पूरा समाधान लिखा था, लेकिन नंबर सिर्फ अंतिम उत्तर पर दिए गए या बिल्कुल नहीं मिले। वहीं कुछ मामलों में पेज पर दिए गए अंकों और फाइनल रिजल्ट में दिख रहे कुल अंकों में भी अंतर बताया गया है।
छात्रों का आरोप है कि डिजिटल मूल्यांकन के दौरान कई मल्टीपेज उत्तर अधूरे तरीके से जांचे गए, जिससे उन्हें नुकसान हुआ।
सिर्फ मूल्यांकन ही नहीं, बल्कि री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया भी छात्रों की नाराजगी की वजह बन गई है। कई छात्रों ने शिकायत की कि आवेदन करते समय पोर्टल बार-बार क्रैश हो रहा था। किसी का पेमेंट फेल हुआ, तो किसी की स्कैन कॉपी ही लोड नहीं हुई।
छात्रों का कहना है कि रिजल्ट को लेकर पहले ही तनाव था, ऊपर से तकनीकी दिक्कतों ने परेशानी और बढ़ा दी है।
हालांकि CBSE पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुका है। बोर्ड का कहना है कि डिजिटल स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रक्रिया में कई स्तरों पर क्वालिटी चेक किए गए थे और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हुई।
विवाद बढ़ने के बाद बोर्ड ने स्कैन कॉपी और री-इवैल्यूएशन की फीस घटाकर 100 रुपये प्रति विषय कर दी थी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि छात्र पहले मार्क्स वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करेंगे, उसके बाद ही स्कैन कॉपी और री-इवैल्यूएशन का विकल्प मिलेगा।
विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। सोशल मीडिया पर लगातार छात्र और अभिभावक CBSE से जवाब मांग रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि अगर डिजिटल सिस्टम लागू किया गया है, तो उसकी विश्वसनीयता और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
अब छात्रों की मांग है कि बोर्ड पूरे ओएसएम सिस्टम की स्वतंत्र समीक्षा कराए और जिन छात्रों को गलत मूल्यांकन का नुकसान हुआ है, उन्हें न्याय मिले।
Updated on:
22 May 2026 01:11 am
Published on:
22 May 2026 01:11 am
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