
CCTV कैमरे सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं (सांकेतिक AI इमेज)
CCTV Cameras Threat to Security: भारत में सुरक्षा की दृष्टि से लगाए गए लाखों CCTV कैमरे अब खुद एक बड़ी सुरक्षा चुनौती के रूप में उभरे हैं। CCTV के जरिए जासूसी के प्रमाण मिलने के बाद अब केंद्रीय खुफिया एजेंसी अब देशव्यापी CCTV नेटवर्क का ऑडिट करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ने हाल ही में कुछ चीनी ब्रांड्स पर रोक लगाई है, लेकिन पहले से स्थापित कैमरे खुफिया एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। वर्तमान में देश में 30 लाख से ज्यादा CCTV कैमरे लगे होने का अनुमान है, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा चीनी कंपनियों का है। अकेले सरकारी संस्थानों में ही करीब 10 लाख चीनी कैमरे लगे हैं।
CCTV कैमरों का खतरा सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है। एक सर्वे के मुताबिक, 79 फीसदी भारतीय घरों में चीनी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस मौजूद हैं। इनमें होम CCTV, स्मार्ट कैमरा और बेबी मॉनिटर जैसे उपकरण शामिल हैं, जो डेटा सीधे क्लाउड पर भेजते हैं। चूंकि इनके अधिकांश सर्वर चीन में स्थित हैं, इसलिए भारतीय नागरिकों की निजी गतिविधियों का डेटा सीधे तौर पर विदेशी पहुंच में है।
CCTV के जरिए जासूसी और हमलों के प्रमाण वैश्विक स्तर पर भी मिले हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में कैमरों से सैनिकों की लोकेशन ट्रैक की गई। ईरान-इजराइल संघर्ष में CCTV हैक करके बड़े नेताओं की लोकेशन का पता लगाते हुए हमले किए गए। भारत में भी गाजियाबाद जासूसी मामला सामने आ चुका है, जहां CCTV फुटेज पाकिस्तान भेजी जा रही थी। पंजाब में भी संवेदनशील इलाकों पर कैमरे लगाकर फुटेज विदेश भेजने का मामला हाल ही सामने आया है।
सार्वजनिक स्थानों जैसे मेट्रो स्टेशन, ट्रैफिक सिग्नल और सैन्य ठिकानों के आसपास की सड़कों पर लगे कैमरे और भी संवेदनशील हैं। इन कैमरों में 'बैकडोर एक्सेस' और कमजोर एन्क्रिप्शन होने के कारण जासूसी का खतरा बढ़ जाता है। चीन के 2017 के इंटेलिजेंस कानून के अनुसार, चीनी कंपनियों के लिए अपनी सरकार के साथ डेटा साझा करना अनिवार्य है। ऐसे में ये कैमरे बीजिंग के लिए 'आंख और कान' का काम कर सकते हैं।
एक अप्रैल 2026 से अप्रमाणित CCTV की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब विदेशी कंपनियों के लिए अपने सोर्स कोड की जांच कराना, चिपसेट की जानकारी देना और साइबर सुरक्षा टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा। भारत का सीसीटीवी बाजार 4.8 अरब डॉलर का है, जिसमें चीनी कंपनियों की 30 फीसदी हिस्सेदारी है, लेकिन विडंबना यह है कि कैमरों के करीब 80 फीसदी कंपोनेंट्स आज भी चीन से ही आते हैं।
CCTV के खतरों को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकारों और निजी संस्थानों को भी अपना डेटा सिक्योरिटी ऑडिट कराना चाहिए। सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद जरूरी है। सेंटर ऑफ पॉलिसी रिसर्च एंड गवर्नेंस के फाउंडर डायरेक्ट एवं डेटा सिक्योरिटी विशेषज्ञ डॉ. रामानंद के मुताबिक, डेटा को लोकल सर्वर पर शिफ्ट किया जाए। इसके अलावा चरणबद्ध तरीके से इन संदिग्ध कैमरों (Suspicious cameras) को बदला जाए। इस प्रकार से CCTV के खतरों से बचा जा सकता है।
Updated on:
13 Apr 2026 05:54 am
Published on:
13 Apr 2026 01:27 am
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