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मुख्य चुनाव आयुक्त  ज्ञानेश कुमार पर 9 गंभीर आरोप, 73 सांसदों ने CEC हटाने की मांग की, 11 पार्टियां एकजुट

Demanded removal CEC: विपक्ष की 11 पार्टियों के 73 सांसदों ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए राज्यसभा में नया नोटिस दिया, जिसमें 9 गंभीर आरोप लगाए गए; पहले भी प्रस्ताव खारिज हो चुका है।

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भारत

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Ankit Sai

Apr 24, 2026

Gyanesh Kumar

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार

CEC Gyanesh Kumar: देश की चुनावी व्यवस्था के सबसे अहम पद पर बैठे मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने न सिर्फ उनके कामकाज पर सवाल उठाए हैं, बल्कि उन्हें पद से हटाने के लिए दोबारा नोटिस देकर सियासत को गरमा दिया है। शुक्रवार को राज्यसभा में 73 सांसदों ने एक नया प्रस्ताव पेश किया। यह दूसरी बार है जब विपक्ष ने इस तरह का कदम उठाया है। इस बार नोटिस पर 11 अलग-अलग पार्टियों के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।

9 आरोपों के साथ नया विवाद खड़ा

चुनाव आयुक्त पर पहले जहां 7 आरोप लगाए गए थे, इस बार आरोपों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। विपक्ष का कहना है कि ये आरोप केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि तथ्यों और दस्तावेजों पर आधारित हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने साफ शब्दों में कहा कि यह मामला साबित गलत आचरण से जुड़ा है और ऐसे व्यक्ति का पद पर बने रहना संविधान के खिलाफ है।

चुनावी फैसलों पर उठे सबसे ज्यादा सवाल

विवाद की जड़ में चुनाव आयोग के कुछ फैसले बताए जा रहे हैं। खासतौर पर बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के संशोधन को लेकर विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्ष का कहना है कि इन फैसलों में निष्पक्षता नहीं दिखाई गई और सत्ताधारी दल को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई।

जानिए पहले क्यों खारिज हुआ था प्रस्ताव?

इससे पहले भी इसी तरह के नोटिस संसद के दोनों सदनों में दिए गए थे। लेकिन लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति ने उन्हें स्वीकार नहीं किया। अब विपक्ष ने ज्यादा आरोपों और मजबूत तर्कों के साथ फिर से कोशिश शुरू की है। यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव शुरू हो चुके हैं। पहले चरण की वोटिंग के बाद ही यह नया विवाद सामने आया, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।

हटाने की प्रक्रिया आसान नहीं

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना आसान नहीं होता। संविधान के मुताबिक यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने जैसी ही है।
इसके लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होती है और आरोपों का साबित होना जरूरी होता है। अगर प्रस्ताव स्वीकार होता है तो एक जांच समिति बनाई जाती है। इसमें न्यायपालिका के वरिष्ठ लोग शामिल होते हैं। आरोपी को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है। उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाता है।