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इतना दिल पर मत लीजिए: कॉकरोच जनता पार्टी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में बोले सीजेआई सूर्यकांत

Supreme Court of India: सुप्रीम कोर्ट में 'कॉकरोच जनता पार्टी' विवाद पर टिप्पणी करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने एक वकील को इस मुद्दे पर ज्यादा भावुक न होने की सलाह दी है।

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भारत

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MI Zahir

May 25, 2026

Supreme Court

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Court Hearing : दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच प्रकरण पर पर याचिका मामले में एक वकील की मंशा पर सवाल उठाते हुए उसे साफ तौर पर जवाब दे दिया -'इसे इतना दिल पर मत लीजिए। ध्यान रहे है कि याचिकाकर्ता स्वयं यह पदवी पाना चाहता था। एक वकील ने हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट के पदनाम से संबंधित निर्देश लेने के लिए याचिका लगाई थी, इस पर मुख्य न्यायाधीश ने जवाब दिया। गौरतलब है कि चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने 'सिस्टम पर प्रहार करने वालों' को लेकर एक बयान दिया था, जिसके तंज के रूप में 'कॉकरोच जनता पार्टी' का गठन हुआ। अब सोशल मीडिया पर इस विषय पर हो रही चर्चा के बीच, आज भारत के मुख्य न्यायाधीश ने एक अधिवक्ता को सलाह दी कि वे इस मामले को लेकर 'भावुकता' न दिखाएं।

कोर्ट रूम की बहसों का व्यावसायिक उपयोग रोका जाए : पीआईएल

एक जनहित याचिका प्रस्तुत करते हुए वकील ने अदालत को बताया कि मुख्य न्यायाधीश के स्पष्टीकरण देने के बाद भी, न्यायपालिका की छवि धूमिल करने के इरादे से दुर्भावनापूर्ण नैरेटिव फैलाया जा रहा है। इस याचिका में यह मांग भी की गई है कि कोर्ट रूम की बहसों का व्यावसायिक उपयोग रोका जाए। इसके अलावा, एक अन्य पीआईएल में 'कॉकरोच जनता पार्टी' की गतिविधियों की जांच करवाने का अनुरोध किया गया है।

इन जनहित याचिकाओं पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार

वकील का तर्क था, 'माननीय सीजेआई के रुख स्पष्ट करने के बावजूद, एक भ्रामक और विद्वेषपूर्ण धारणा का प्रचार किया जा रहा है।' इस पर मुख्य न्यायाधीश ने उत्तर दिया, 'इसे इतना दिल पर मत लीजिए।' साथ ही, उन्होंने इन जनहित याचिकाओं पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा कि सही समय आने पर अदालत इन पर विचार करेगी। ध्यान रहे कि इससे पूर्व 15 मई को मुख्य न्यायाधीश द्वारा अदालत में की गई कुछ टिप्पणियों से विवाद पैदा हो गया था, जिसके परिणामस्वरूप इंटरनेट पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक अभियान चल पड़ा।

क्या आप भी उनसे हाथ मिलाना चाहते हैं ?

दरअसल, दिल्ली हाई कोर्ट को वरिष्ठ वकील के पदनाम को लेकर निर्देश देने की मांग करने वाले एक याचिकाकर्ता वकील को मुख्य न्यायाधीश ने आड़े हाथों लिया था, क्योंकि वह खुद भी इस पद की चाह रखता था। चीफ जस्टिस ने उससे पूछा था कि क्या इस पद के लिए इस तरह 'प्रयास करना' उचित' है? उन्होंने कहा, 'सिस्टम पर हमला करने वाले परजीवी समाज में पहले से ही मौजूद हैं, क्या आप भी उनसे हाथ मिलाना चाहते हैं ? कुछ युवा कॉकरोच की तरह होते हैं, जिनके पास न तो कोई रोजगार होता है और न ही इस पेशे में कोई स्थान। ऐसे लोग ही मीडिया, सोशल मीडिया, आरटीआई और अन्य क्षेत्रों के कार्यकर्ता बन कर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।'

युवाओं की आलोचना करने वाली बात 'पूर्णतः आधारहीन': मुख्य न्यायाधीश

जब इन बातों पर हंगामा बढ़ा, तो मुख्य न्यायाधीश ने सफाई देते हुए कहा कि युवाओं की आलोचना करने वाली बात 'पूर्णतः आधारहीन' है। उनका स्पष्टीकरण था: 'मेरी आलोचना का मुख्य लक्ष्य वे लोग थे, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत (बार) जैसे पेशे में आ गए हैं। ऐसे लोग मीडिया, सोशल मीडिया और अन्य प्रतिष्ठित क्षेत्रों में भी घुसपैठ कर चुके हैं, और इसीलिए वे परजीवियों के समान हैं। यह कहना बिलकुल गलत है कि मैंने देश के युवाओं की आलोचना की है। मुझे भारत के वर्तमान और भावी मानव संसाधन पर बेहद गर्व है और देश का हर युवा मेरे लिए प्रेरणास्रोत है।'

अकाउंट पर रोक के बाद कॉकरोच इज बैक

मुख्य न्यायाधीश के बयान की प्रतिक्रिया स्वरूप महाराष्ट्र के रहने वाले और वर्तमान में अमेरिका में रह रहे 30 वर्षीय अभिजीत दिपके ने 'कॉकरोचों' के लिए एक मंच बनाने का ऐलान किया। इसके बाद इंटरनेट पर एक नया ट्रेंड चल पड़ा। हालांकि, बीते गुरुवार को भारत में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के 'एक्स' (X) अकाउंट पर रोक लगा दी गई। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, इंटेलिजेंस ब्यूरो की ओर से 'राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं' का हवाला देने के बाद, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश पर यह कार्रवाई की गई। इसके फौरन बाद, दिपके ने एक्स पर 'कॉकरोच इज बैक' नामक एक नया हैंडल बनाकर लोगों से उसमें जुड़ने की अपील की।