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कांग्रेस में ‘बगावत’ या राष्ट्रहित? शशि थरूर के बाद आनंद शर्मा ने भी थपथपाई मोदी सरकार की पीठ, विपक्ष में मची हलचल

Anand Sharma Congress: आनंद शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा भंडारों पर लगातार बमबारी से उत्पन्न ऊर्जा संकट बेहद गंभीर है। उन्होंने भारत की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ में भारत की अहमियत और बढ़ गई है।

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Anand Sharma

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा

India West Asia Policy: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री आनंद शर्मा ने गुरुवार को पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपनाते हुए मोदी सरकार की पश्चिम एशिया में चल रही पूर्ण युद्ध स्थिति के बीच विदेश नीति और रणनीतिक कदमों की सराहना की। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण संघर्ष के बीच शर्मा ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर विस्तृत पोस्ट में स्थिति की गंभीरता को रेखांकित किया।

विदेश नीति के मुरीद हुए कांग्रेस नेता आनंद शर्मा

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने लिखा कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा भंडारों पर लगातार बमबारी से उत्पन्न ऊर्जा संकट बेहद गंभीर है। उन्होंने भारत की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि ग्लोबल साउथ में भारत की अहमियत और बढ़ गई है। उन्होंने भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया को परिपक्व और कुशल बताया, जो संभावित खतरों से बचने में सफल रही।

मिडिल ईस्ट स्टैंड की जमकर तारीफ

उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि भारतीय कूटनीतिक संचालन संकट को परिपक्व और कुशल तरीके से संभाल रहा है, जो संभावित माइन्सफील्ड्स से बच रहा है। भारत की प्रतिक्रिया को राष्ट्रीय सहमति और संकल्प के साथ समर्थन मिलना चाहिए। सरकार ने सभी दलों की बैठक बुलाकर राजनीतिक दलों के नेतृत्व को अस्थिर और अस्थिर स्थिति में नीतिगत फैसलों से अवगत कराया है।

आनंद शर्मा ने केंद्र सरकार का किया समर्थन

उन्होंने आगे कहा कि यह राष्ट्रीय संवाद जारी रहना चाहिए। राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीय हित से प्रेरित परिपक्व प्रतिक्रिया इस समय की जरूरत है। शर्मा ने भारत की विदेश नीति की लंबी परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सदैव नैतिक अधिकार और शांति की प्रतिबद्धता पर खड़ा रहा है। बहुत कुछ दांव पर है, खासकर युवा पीढ़ी का भविष्य। भारत को ग्लोबल साउथ और रणनीतिक साझेदार देशों को जुटाकर शांति और व्यवस्था की बहाली के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए।

राहुल गांधी के रुख से अलग आनंद शर्मा की राह?

यह बयान कांग्रेस की आधिकारिक स्टैंड से साफ अलग है, जहां पार्टी मोदी सरकार पर अमेरिका-इजरायल एक्सिस की ओर झुकाव और ईरान के साथ पुराने संबंधों को कमजोर करने का आरोप लगाती रही है। शर्मा ने सरकार की सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ जुड़ाव वाली नीति का बचाव किया, जो पार्टी की आलोचना से अलग है।

यह घटना राहुल गांधी के समर्पण कथा (surrender narrative) को भी करारा झटका देती है, जिसे विपक्ष सरकार को घेरने के लिए इस्तेमाल कर रहा था। आनंद शर्मा तीसरे कांग्रेस वरिष्ठ नेता हैं जिन्होंने केंद्र की पश्चिम एशिया नीति पर भरोसा जताया है। इससे पहले शशि थरूर और मनीष तिवारी जैसे सांसदों ने भी भारत की कुशल कूटनीति और खाड़ी क्षेत्र में रह रहे बड़ी संख्या में भारतीयों के हितों की रक्षा की सराहना की थी।