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17 सालों से चल रहे तलाक के मामले में हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला, 50 लाख एलिमनी देने का दिया आदेश

17 सालों से चल रहे एक तलाक के मामले में कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए तलाक की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने पति को अपनी पत्नी को एकमुश्त 50 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।

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भारत

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Himadri Joshi

Dec 28, 2025

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कोर्ट। फाइल फोटो

तेलंगाना हाई कोर्ट ने हाल ही में तलाक के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने करीब 17 साल पहले टूटी हुई एक शादी को खत्म करने के फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने इस मामले में तलाक की मंजूरी देते हुए पति को आदेश दिया है कि वह पत्नी को गुजारा भत्ते के तौर पर 50 लाख रुपये दे।

कोर्ट ने 1 दिसंबर को दिया फैसला

जस्टिस के. लक्ष्मण और जस्टिस नरसिंह राव नंदीकोंडा की बेंच ने 1 दिसंबर को दिए अपने इस फैसले में फैमिली कोर्ट के उस तर्क पर जोर दिया जिसमें पति- पत्नी के रिश्ते के पूरी तरह से टूट जाने की बात की गई थी। यह मामला द्रोणमराजू विजया लक्ष्मी और द्रोणमराजू श्रीकांत फणी कुमार के तलाक से जुड़ा है। इन दोनों की शादी मई 2002 में हुई थी और 2003 में इनके यहां एक बेटी का जन्म हुआ था। इसके बाद से ही दोनों अलग रह रहे थे।

2008 में शुरू हुई तलाक की कानूनी लड़ाई

दोनों के बीच तलाक की यह कानूनी लड़ाई 2008 में शुरू हुई जब पति ने क्रूरता और बिना बताए छोड़कर चले जाने के आधार पर पत्नी से तलाक मांगा था। वहीं पत्नी ने अपने वैवाहिक संबंधों की बहाली को लेकर कोर्ट में अर्जी दी थी। इसका मतलब है कि पति शादी खत्म करके अलग होना चाहता था और पत्नी चाहती थी कि कोर्ट उसके पति को उसके साथ रहने का आदेश दे।

इस दौरान एक दूसरे पर किए कई सारे केस

लंबे समय तक चले इस कानूनी विवाद में कई अन्य मामले भी शामिल हैं। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक दूसरे के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-ए के तहत कई आपराधिक शिकायतें की और पत्नी ने मेंटेनेंस पाने के लिए कोर्ट में अर्जी भी दी। इसके अलावा पति के पिता द्वारा अपनी पोती को दी गई एक 'गिफ्ट डीड' (उपहार के रूप में संपत्ति देना) को लेकर भी दोनों के बीच एक मामला चल रहा है।

फरवरी 2015 में निचली अदालत ने दिया तलाक

फरवरी 2015 में निचली अदालत ने इन दोनों के तलाक को मंजूरी दे दी थी, लेकिन फिर पत्नी ने इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर कर दी। पत्नी ने कोर्ट में अपनी बेटी (जो अब 22 साल की है और MBBS की पढ़ाई कर रही है) के लिए पति के साथ रहने की अपील की। लेकिन कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि इतने लंबे समय तक अलग रहने के बाद अब पत्नी को भी पति के साथ रहने में कोई दिलचस्पी नहीं है।

हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा

हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि आपसी अविश्वास और दोनों के बीच चल रहे ढेरों कानूनी मुकदमों की वजह से, अब यह शादी ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां से वापसी की कोई उम्मीद नहीं है। कोर्ट ने दोनों के तलाक को मंजूरी देते हुए यह पाया कि निचली अदालत ने पत्नी को मिलने वाले गुजारा भत्ते को तय करने में गलती की थी। ऐसे में सभी पुराने मामलों को पूरी तरह से खत्म करने के लिए कोर्ट ने पति को अपनी पत्नी को एकमुश्त 50 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। पति को यह राशि तीन महीने के अंदर देनी होगी।