
आंध्र प्रदेश में कोविड के मामले बढ़े - (File Photo- ANI)
Covid cases: आंध्र प्रदेश में कोरोना के मामले सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। राज्य में 26 जून से 16 जुलाई के बीच कोरोना संक्रमण के 12 मामले सामने आए हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त (कमिश्नर) वीरा पांडियन ने दी है। राज्य सरकार ने वायरस के वैरिएंट का पता लगाने के लिए पांच सैंपल पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजे हैं। उधर, कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए पड़ोसी राज्य कर्नाटक में भी एहतियात बढ़ा दिए गए हैं।
वीरा पांडियन के मुताबिक, कोविड से जिन चार मरीजों की मौत हुई, वे पहले से ही गंभीर बीमारियों (कॉमॉर्बिडिटी) से पीड़ित थे। देशभर में 1 जुलाई से अब तक कोविड-19 के कुल 339 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 12 मामले आंध्र प्रदेश के हैं।
आंध्र प्रदेश के कडपा में 8, गुंटूर में 2 तथा विशाखापत्तनम और काकीनाडा में 1-1 कोरोना के मामले दर्ज किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ये सभी मामले अलग-अलग इलाकों से सामने आए हैं और कहीं भी संक्रमण का कोई क्लस्टर नहीं बना है। फिलहाल तीन मरीज होम आइसोलेशन में हैं, दो अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि तीन मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो चुके हैं।
पड़ोसी राज्य कर्नाटक में सावधानियां बरती जा रही हैं। तुमकुर की उपायुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट शुभा कल्याण ने कहा, 'आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से संबंधित मौतों की खबरों के बाद तुमकुर जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। खासकर पावगड़ा तालुक, जिसकी सीमा आंध्र प्रदेश से लगती है, वहां विशेष सतर्कता बरती जा रही है ताकि हमारे जिले में इस तरह का कोई मामला सामने न आए।'
उन्होंने् आगे कहा, 'एहतियात के तौर पर पावगड़ा तालुक में पांच चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं। इन चेक पोस्टों पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और आशा कार्यकर्ताओं की तैनाती की गई है। फिलहाल पावगड़ा तालुक में बुखार के मामलों में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है। यहां अब तक बुखार के लगभग 119 मामले दर्ज किए गए हैं। वर्तमान में राज्य सरकार की ओर से कोविड-19 जांच कराने का कोई निर्देश नहीं है। हालांकि, जिला अस्पताल में हमारी अपनी लैब उपलब्ध है। आवश्यकता पड़ने पर जांच के लिए नमूने बेंगलुरु भी भेजे जाएंगे।'
कोरोना वायरस के अब तक हजारों वैरिएंट और सब-वैरिएंट सामने आ चुके हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने प्रमुख वैरिएंट्स में अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा और ओमिक्रॉन को शामिल किया था। इनमें ओमिक्रॉन सबसे अधिक तेजी से फैला। इसके बाद BA.1, BA.2, BA.5, XBB, JN.1, KP.2, KP.3 और अन्य कई सब-वैरिएंट सामने आए। वर्तमान में दुनिया के अधिकांश कोविड-19 मामले ओमिक्रॉन और उसके सब-वैरिएंट्स से जुड़े हैं। वैज्ञानिक लगातार नए वैरिएंट्स की निगरानी कर रहे हैं ताकि संभावित जोखिम का समय रहते आकलन किया जा सके।
Updated on:
17 Jul 2026 12:46 pm
Published on:
17 Jul 2026 12:35 pm
