
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। (फोटो- ANI)
एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह रहे हैं कि बातचीत हो रही है और डील होने वाली है। वहीं, दूसरी ओर ईरान कह रहा है कि कोई बात नहीं हुई। यह अजीब खेल है जो पिछले कई हफ्तों से चल रहा है।
भारत के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक अशोक सज्जनहार ने एनएनआई से बात करते हुए इस पूरे मामले को बड़े सीधे तरीके से समझाया और उनकी बात सुनकर लगता है कि असली खेल कहीं और चल रहा है।
सज्जनहार ने कहा कि पूरी स्थिति बेहद उलझी हुई और अनिश्चित है। ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि वो सही लोगों से बात कर रहे हैं और ईरान ने उन्हें 10 टैंकर तेल का तोहफा दिया है। लेकिन ईरान की तरफ से जो बयान आ रहे हैं वो बिल्कुल अलग हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई संकेत नहीं है जिससे लगे कि ईरान बातचीत में दिलचस्पी रखता है या आगे बढ़ना चाहता है।
सज्जनहार ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिश पर भी बात की। उन्होंने कहा कि तीन क्षेत्रीय विदेश मंत्री पाकिस्तान में बैठकें कर रहे हैं लेकिन इसमें ईरान का कोई प्रतिनिधि नहीं है।
उनके मुताबिक ईरान को पाकिस्तान पर खास भरोसा नहीं है। और तेहरान ने एकदम साफ कर दिया है कि वो इस जंग को अपनी शर्तों पर ही खत्म करेगा।
सज्जनहार ने कहा कि ईरान को पता है कि ट्रंप कई वजहों से जंग जल्दी खत्म करना चाहते हैं। दुनिया भर में तेल और ऊर्जा के दाम बढ़ रहे हैं।
अमेरिका में पेट्रोल पंप पर कीमतें आसमान छू रही हैं। देश और दुनिया में इस जंग के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है। और सबसे बड़ी बात, अमेरिका में मिड-टर्म चुनाव नजदीक आ रहे हैं और ट्रंप का समर्थन घट रहा है।
इन सब बातों को समझते हुए ईरान अपनी पोजीशन से हटने को तैयार नहीं है। सज्जनहार ने कहा कि क्षेत्र से जो संदेश आ रहे हैं उनसे बिल्कुल नहीं लगता कि जंग जल्द खत्म होने वाली है।
दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिकी सेना का ऑपरेशन "एपिक फ्यूरी" योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि अब तक 11 हजार से ज्यादा दुश्मन के ठिकानों पर हमले हो चुके हैं। हर हमले के साथ ईरानी हुकूमत की ताकत कमजोर हो रही है और अमेरिका की पकड़ मजबूत हो रही है।
सज्जनहार की बात मानें तो जमीनी हकीकत इससे अलग है। एक तरफ अमेरिका कामयाबी के दावे कर रहा है, दूसरी तरफ ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है और बातचीत की मेज पर आने से इनकार कर रहा है।
यह जंग अभी लंबी खिंचती दिख रही है और इसका खामियाजा सिर्फ ईरान या अमेरिका को नहीं बल्कि पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है।
Published on:
31 Mar 2026 02:49 pm
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