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ऑनलाइन शॉपिंग में बिल देखकर चौंक जाते हैं? जानिए कंपनियों की चालाकी और कैसे बचेगी आपकी जेब

Online Shopping Fraud: क्या ऑनलाइन शॉपिंग या टिकट बुकिंग के वक्त आपका बिल भी अचानक बढ़ जाता है? जानिए कंपनियों की 'डार्क पैटर्न' वाली चालाकी और CCPA की कार्रवाई के बाद अब कैसे सुरक्षित रहेंगे आपके पैसे।
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भारत

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Pratiksha Gupta

Aug 08, 2026

Hidden Charges in Online Shopping, Platform Fee Fraud, Basket Snaking

ऑनलाइन शॉपिंग में डार्क पैटर्न से सावधान | फोटो सोर्स-chatgpt

Digital Fraud Protection: क्या ऑनलाइन खाना मंगाते, मूवी टिकट बुक करते या फ्लाइट टिकट लेते समय आपने ध्यान दिया है कि चेकआउट के समय आपका बिल अचानक बढ़ जाता है। कभी प्लेटफॉर्म फीस, कभी हैंडलिंग चार्ज, तो कभी आपकी बिना मर्जी के जुड़ा डोनेशन या बीमा। इसे ही डिजिटल दुनिया में 'डार्क पैटर्न' कहा जाता है। यह वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स का एक ऐसा चालाक डिजाइन है, जिसमें फंसाकर कंपनियां ग्राहकों की जेब ढीली कर लेती हैं।
हाल ही में सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने इस तरह की डिजिटल चालाकी पर कड़ा रुख अपनाते हुए जेप्टो और इंडिगो समेत 9 बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कार्रवाई की है।

आखिर क्या है यह डार्क पैटर्न?

डार्क पैटर्न किसी ऐप या वेबसाइट का ऐसा चालाकी भरा डिजाइन होता है, जो यूजर को न चाहते हुए भी अतिरिक्त सामान खरीदने, ज्यादा पैसे चुकाने, जबरन सब्सक्रिप्शन लेने या अपनी निजी जानकारी साझा करने पर मजबूर कर देता है। यूजर को लगता है कि वह सामान्य खरीदारी कर रहा है, लेकिन स्क्रीन के पीछे छुपा यह डिजाइन उसका बिल चुपचाप बढ़ा देता है।

ग्राहकों को जाल में फांसने की 5 बड़ी चालाकियां

  • छिपे हुए चार्ज: सामान की शुरुआती कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन पेमेंट पेज तक पहुंचते-पहुंचते चुपके से 'हैंडलिंग चार्ज' या 'प्लेटफॉर्म फीस' के नाम पर 10 से 50 रुपये तक अतिरिक्त जोड़ दिए जाते हैं।
  • बास्केट स्नेकिंग: आपकी बिना अनुमति के शॉपिंग कार्ट में कोई इंश्योरेंस, मैगजीन या मेम्बरशिप प्लान पहले से जोड़ दिया जाता है।
  • ऑटो-टिक डोनेशन: चैरिटी या दान वाले बॉक्स पर पहले से 'राइट टिक' लगा होता है। अगर आपका ध्यान न जाए, तो आपके खाते से डोनेशन के पैसे कट जाते हैं।
  • डराने वाली भाषा: किसी अतिरिक्त सर्विस को मना करने पर 'नहीं, मैं जोखिम उठाने को तैयार हूं' जैसे मैसेज दिखाकर मानसिक दबाव बनाया जाता है।
  • सब्सक्रिप्शन ट्रैप: किसी सर्विस को जॉइन करना तो बेहद आसान होता है, लेकिन उसे कैंसिल या अकाउंट डिलीट करने का ऑप्शन इतना छुपा दिया जाता है कि यूजर परेशान हो जाए।

CCPA के शिकंजे से ग्राहकों को क्या मिलेगा फायदा?

  • अब चेकआउट के समय अचानक से चार्ज नहीं बढ़ेंगे। कंपनियों को शुरुआत में ही पूरा और पारदर्शी बिल दिखाना होगा।
  • टिकट या कोचिंग कोर्स लेते समय डोनेशन, मैगजीन या बीमा का 'डिफॉल्ट टिक' हटेगा। जब तक ग्राहक खुद क्लिक नहीं करेगा, पैसा नहीं कटेगा।
  • 'बीमा न लेने पर रिस्क होगा' जैसी डरावनी भाषा पर रोक लगेगी। ग्राहकों को साफ और निष्पक्ष विकल्प दिए जाएंगे।
  • फ्री स्टडी मटीरियल या मॉक टेस्ट के नाम पर कोचिंग ऐप्स द्वारा मांगी जाने वाली गैर-जरूरी निजी जानकारियों पर रोक लगेगी।

डिजिटल ठगी से बचने के 5 आसान टिप्स

  • अंतिम बिल की जांच- पेमेंट का बटन दबाने से पहले बिल के हर एक चार्ज को ध्यान से पढ़ें।
  • ऑटो-टिक हटाएं- चेकआउट पेज पर पहले से लगे किसी भी टिक को अनटिक करें।
  • गैर-जरूरी डेटा न दें- ऐप्स पर सिर्फ काम की जानकारी दें, अत्यधिक पर्सनल डिटेल्स शेयर करने से बचें।
  • दबाव में न आएं- 'सेल खत्म होने में 2 मिनट बचे हैं' या डराने वाले मैसेजेस के झांसे में न आएं।
  • सब्सक्रिप्शन की शर्तें पढ़ें- कोई भी सर्विस लेने से पहले उसे कैंसिल करने की प्रक्रिया जरूर जान लें।

अगर आपके साथ भी हो चालाकी, तो यहां करें शिकायत

यदि कोई ऐप या वेबसाइट आपको डार्क पैटर्न के जरिए चूना लगाती है, तो आप राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline) पर तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं। टोल-फ्री नंबर 1915 पर कॉल करें या फिर व्हाट्सएप/एसएमएस कर इस नंबर पर 8800001915 मैसेज भेजकर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।