
बारिश। (Photo Credit- ANI)
Monsoon Update 2026: देश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश के असामान्य पैटर्न ने चिंता बढ़ा दी है। मानसून सीजन के दो माह जून-जुलाई और अगस्त का एक सप्ताह गुजर जाने के बावजूद राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत 14 राज्य बारिश की भारी कमी झेल रहे हैं। पूरे देश में अभी तक सामान्य औसत बारिश 509.6 मिमी की तुलना में 451.9 मिमी बारिश यानी 11 प्रतिशत बारिश कम हुई है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले 10 दिन में कमी वाले राज्यों में मानसून की अच्छी बारिश नहीं हुई तो वहां सूखे जैसे हालात बन जाएंगे। फसलों का उत्पादन गिरने पर खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका पर संकट बढ़ेगा। वहीं शहरों की पेयजल व्यवस्था, जलविद्युत और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।
चिंता इसलिए बढ़ रही है, क्योंकि मानसून की बारिश का ट्रेंड अब पहले जैसा समान और नियमित नहीं रह गया है। एक ही समय में कुछ प्रदेशों/क्षेत्रों में भारी बारिश से बाढ़ आ रही है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में कम बारिश से सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। ज्यादा बारिश वाले पूर्वोत्तर राज्यों में भी बारिश की भारी कमी है।
बारिश छोटे-छोटे लेकिन बहुत तीव्र स्पेल में हो रही है और सूखे के लंबे अंतराल बढ़ रहे हैं। कुल राष्ट्रीय औसत बारिश में बहुत बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा, लेकिन स्थानिक और समयबद्ध विविधता तेजी से बढ़ रही है। बाढ़ के हालात से जूझने वाले राज्य असम, केरल व गुजरात में भी अतिवृष्टि की बजाय समग्र बारिश में की कमी हैं। ऐसे हालात मानसून की बारिश का असामान्य वितरण के कारण बने हैं।
देश के कुछ क्षेत्रों (राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र के कुछ हिस्से, पश्चिमी तट) में बारिश बढ़ रही है। लेकिन केरल, पूर्वोत्तर, गंगा के मैदान और कुछ मध्य भारत के क्षेत्रों में कमी या अधिक शुष्क स्पेल सामने आ रहे हैं। भारी बारिश के दिनों की संख्या कई तहसीलों में बढ़ी है, जबकि मध्यम बारिश कम हो रही है। राजस्थान के 18 जिलों में बारिश की कमी है, जबकि 6 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है। मध्यप्रदेश के 55 जिलों में से 2 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई तो 53 जिलों में बारिश की कमी से सूखे जैसे हालात बने हुए हैं। छत्तीसगढ़ में 9 जिलों में बारिश की कमी है।
मौसम विभाग (आइएमडी), अमृता विश्व विद्यापीठम, एनआइटी पटना और भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिकों ने मिलकर बारिश के 124 के रिकॉर्ड के पैटर्न पर अध्ययन किया है। अध्ययन के अनुसार बारिश पहले के सालों की तरह पूरे मौसम में बराबर नहीं हो रही। मौसम का ऐसा ही ट्रेंड रहा तो देश में कुछ जगहों पर बाढ़ और कुछ हिस्सों में सूखे का खतरा बढ़ सकता है।
14 प्रदेशों में भारी कमी
22 प्रदेशों में कमी व सामान्य के करीब
2 राज्यों में सामान्य से अधिक (लद्दाख व ओडिशा)-
प्रमुख राज्यों में बारिश की कमी (प्रतिशत में)-
मध्यप्रदेश- 20
राजस्थान- 18
हरियाणा- 22
पंजाब- 34
असम- 24
केरल- 21
कर्नाटक-19
आंध्रप्रदेश- 33
छत्तीसगढ़- 6
बिहार- 36
झारखंड- 26
असम : बारिश 24 प्रतिशत कम
लगातार बारिश और नदियों के उफान से बाढ़ के हालात बने। अब तक 97 लोगों की मौत हुई। 15 जिलों में करीब 1.78 लाख लोग प्रभावित हुए। अभी तक सामान्य औसत बारिश 931.4 मिमी की तुलना में 712.3 मिमी यानी 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
केरल : बारिश 21 प्रतिशत कम
भारी बारिश, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड के कारण 15 लोगों की मौत हो गई। सामान्य औसत बारिश 1426.3 की तुलना में अब तक 1126.5 प्रतिशत यानी 21 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
गुजरात : बारिश की और दरकार
जुलाई में कई जिलों में बाढ़ से 35 लोगों की मौत हो गई। सीजन में 433.6 मिमी की सामान्य औसत की तुलना में 484.5 प्रतिशत यानी 12 प्रतिशत बारिश ही ज्यादा हुई।
-जलवायु परिवर्तन : गर्म वातावरण से अधिक नमी बन जाती है। जब बारिश होती है तो वह बहुत भारी हो जाती है, जिससे बाढ़ बन जाती है। साथ ही शुष्क अवधि लंबी होने पर सूखे के हालात बन जाते हैं।
-अलनीनो : बड़े पैमाने के जलवायु पैटर्न अल नीनो का असर अक्सर मानसून को कमजोर करता है।
-इंडियन ओशन डाइपोल: पॉजिटिव आइओडी भारत में अधिक बारिश ला सकता है और अल नीनो के प्रभाव को कम कर सकता है।
-मानवीय कारण : शहरीकरण, वनों की कटाई, आर्द्रभूमि का विनाश और भूमि उपयोग में बदलाव। कंक्रीट के कारण पानी जमीन में नहीं समाता है। इससे शहरों में बाढ़ बन जाती है।
Updated on:
08 Aug 2026 06:45 am
Published on:
08 Aug 2026 06:45 am
