
प्रतीकात्मक तस्वीर
Delhi Ebola Alert: दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इबोला को लेकर अलर्ट जारी किया गया है और लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। इससे यात्रियों और आम लोगों के बीच हलचल बढ़ गई है। आपको बता दें कि यह अलर्ट अफ्रीका के कुछ देशों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जारी किया गया है। एयरपोर्ट पर खासतौर पर उन यात्रियों की जांच की जा रही है जो कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे प्रभावित देशों से आ रहे हैं या वहां से ट्रांजिट होकर पहुंचे हैं।
एयरपोर्ट पर जारी हेल्थ एडवाइजरी में यात्रियों से खास सतर्कता बरतने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने निर्देश दिए हैं कि यदि किसी यात्री को बुखार, कमजोरी, उल्टी, दस्त, गले में दर्द या असामान्य ब्लीडिंग जैसे लक्षण महसूस हों तो वह तुरंत मेडिकल टीम को जानकारी दे। इसके अलावा जिन लोगों को लगता है कि वे किसी संक्रमित व्यक्ति के खून, लार, उल्टी या शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क में आए हैं, उन्हें भी तुरंत स्वास्थ्य अधिकारियों को जानकारी देने के लिए कहा गया है।
इबोला वायरस डिजीज (EVD) एक बहुत गंभीर और जानलेवा बीमारी है। इसकी शुरुआत आज से करीब 50 साल पहले (1976 में) अफ्रीका के कांगो देश से हुई थी। यह वायरस सीधे इंसान के इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) और खून की नसों पर हमला करता है। हालत बिगड़ने पर मरीज के शरीर के अंदर और बाहर, दोनों तरफ से ब्लीडिंग होने लगती है। इबोला कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके अलग-अलग दौर में मौत का आंकड़ा 25% से लेकर 90% तक रहा है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को इलाज कैसा और कितनी जल्दी मिला।
इस वायरस के संपर्क में आने के बाद 2 से 21 दिनों के अंदर शरीर में लक्षण दिखने शुरू होते हैं।
इबोला और कोविड-19 में सबसे बड़ा अंतर इनके फैलने के तरीके में है। कोरोना की तरह इबोला हवा के जरिए नहीं फैलता। यह वायरस तब फैलता है जब आप किसी संक्रमित मरीज के सीधे संपर्क में आते हैं- यानी उसके खून, पसीने, लार या उल्टी जैसी चीजों के टच में आने से ही यह आगे बढ़ता है।
अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के मामले बढ़ने पर वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने बड़ी चेतावनी जारी की है। इसी वजह से भारत सरकार ने भी एहतियात के तौर पर इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर चेकिंग और स्क्रीनिंग सख्त कर दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाई-लेवल मीटिंग्स करके एंट्री पॉइंट्स पर लैब्स और अलर्ट सिस्टम को एक्टिव कर दिया है।
राहत की बात यह है कि फिलहाल भारत में इबोला का एक भी केस नहीं है। इसलिए एयरपोर्ट पर की जा रही यह सख्ती किसी डर या पैनिक की वजह से नहीं है, बल्कि इसका सिर्फ मकसद यह है कि अगर कोई संक्रमित यात्री भारत आए, तो उसे शुरुआत में ही ट्रैक कर लिया जाए ताकि आम जनता में यह बीमारी न फैल सके।
भारत को अभी चिंता करने की जरूरत नहीं है, बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर विदेश से आने वाले यात्रियों की वजह से खतरे को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि कोविड के बाद भारत की हेल्थ व्यवस्था पहले से काफी मजबूत हो चुकी है। इस मामले में सबसे ज्यादा चिंता इस बात की रहती है कि कहीं कोई संक्रमित व्यक्ति समय पर पकड़ा न जाए और वह परिवार या अस्पताल के स्टाफ के संपर्क में आ जाए। इसी वजह से स्वास्थ्य एजेंसियां यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री और लक्षणों पर खास नजर रख रही हैं।
Updated on:
21 May 2026 01:10 pm
Published on:
21 May 2026 12:25 pm
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