
Delhi Elections: दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां तेज कर कर दी है। इस चुनाव में कांग्रेस ने नई दिल्ली सीट से वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित को टिकट दिया है। इस हॉट सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। संदीप दीक्षित का मुकाबला आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता प्रवेश वर्मा होगा। दीक्षित के लिए यह सीट एक विरासत का सवाल बन चुकी है। उनकी मां और दिल्ली की तीन बार मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित ने इस सीट पर पहले जीत दर्ज कर चुकी हैं। संदीप दीक्षित की छवि एक साफ-सुथरे और पढ़े-लिखे नेता के रूप में बनी है, जो कांग्रेस के लिए नई उम्मीद पैदा कर सकते हैं।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित लगातार पूर्व सीएम केजरीवाल पर लगातार हमला बोल रहे हैं। संदीप के लिए नई दिल्ली सीट पर चुनावी चुनौती सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक विरासत से जुड़ी हुई है। आपको बता दें कि शीला दीक्षित ने साल 2008 में इस सीट पर जीत हासिल की थी जब यह सीट अस्तित्व में आई थी। इससे पहले वह गोल मार्केट से विधायक चुनी गई थीं। तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित साल 2013 के विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल से हार गई थी।
बता दें कि पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से 2004 और 2009 में सांसद रहे संदीप दीक्षित हमेशा आप प्रमुख केजरीवाल के विरोध में रहते हैं। कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की कोशिश की, तभी संदीप ने इसका विरोध किया था। साल 2019 में जब कांग्रेस और आप के गठबंधन की चर्चा हुई, तब संदीप ने कहा था कि आत्मसम्मान से बड़ी कोई चीज नहीं है। हम अपने सम्मान को छोड़कर उनके साथ खड़े नहीं हो सकते। इस प्रकार से हमेशा ही उनका रूख केजरीवाल के खिलाफ ही रहा है।
राजनीति में एंट्री आने से पहले संदीप दीक्षित ने सामाजिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण गतिविधियों में हिस्सा लिया। वे 'संकेत सूचना और अनुसंधान एजेंसी' नामक सामाजिक विकास समूह का नेतृत्व कर चुके है। इसके अलावा सोनीपत स्थित ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में वह संकाय सदस्य के रूप में भी काम किया हैं।
संदीप दीक्षित का जन्म 15 अगस्त 1964 को हुआ था। उनके पिता विनोद दीक्षित उत्तर प्रदेश कैडर के एक आईएएस अधिकारी थे। दीक्षित ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से मास्टर डिग्री की है और इसके बाद ग्रामीण विकास में अध्ययन किया है। 15 साल से ज्यादा समय तक राजस्थान, गुजरात, पंजाब, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में उन्होंने ग्रामीण विकास और मानव विकास के मुद्दों पर काम किया है।
Published on:
18 Jan 2025 02:52 pm
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