
SIR में BLA की जिम्मेदारी पर दिल्ली HC की दो टूक (Photo-IANS)
Delhi High Court BLA SIR: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के दौरान राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बूथ लेवल एजेंट्स (BLA) की जिम्मेदारी को लेकर अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि बीएलए को मतदाता द्वारा भरे गए गणना और घोषणा पत्र में दर्ज सभी जानकारियों के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उनकी जिम्मेदारी केवल उन्हीं जानकारियों तक सीमित हो सकती है, जिन्हें वे स्वयं सत्यापित कर सकते हैं।
जस्टिस अमित बंसल ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 के तहत बीएलए को केवल ऐसी जानकारी के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जिसका वह सत्यापन कर सकता है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उदाहरण देते हुए बताया कि बीएलए यह देख सकता है कि गणना प्रपत्र में लगी तस्वीर मतदाता की पहचान से मेल खाती है या नहीं।
बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली कांग्रेस नेताओं की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई थी। याचिका में चुनाव आयोग की उस शर्त को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के BLA को व्यक्तिगत अंडरटेकिंग देकर यह प्रमाणित करना था कि उन्होंने SIR के दौरान गणना प्रपत्र में दर्ज जानकारियों का सत्यापन किया है।
दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव और DPCC की बूथ मैनेजमेंट कमेटी के चेयरमैन राजेश कुमार गर्ग ने यह याचिका दाखिल की थी।
याचिकाकर्ताओं ने ECI की 24 जून 2025 की गाइडलाइंस की धारा 9(d)(iv) को चुनौती दी थी। इस प्रावधान में BLA से यह अंडरटेकिंग मांगी गई थी कि उन्होंने आवेदन फॉर्म में दर्ज जानकारियों को व्यक्तिगत रूप से सत्यापित किया है और उनकी शुद्धता से संतुष्ट हैं।
इसके अलावा, दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की ओर से 27 अप्रैल 2026 को जारी उस आदेश को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें इस आवश्यकता को दोहराया गया था।
कांग्रेस नेताओं ने दलील दी थी कि मतदाता के विवरण का सत्यापन करना वैधानिक रूप से BLO, AERO और ERO की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि प्रशासनिक निर्देश के जरिए यह जिम्मेदारी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को नहीं सौंपी जा सकती।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि BLA से इस तरह का अंडरटेकिंग लेना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950और मतदाताओं के पंजीकरण नियम, 1960 में किसी वैधानिक प्रावधान पर आधारित नहीं है। उनके मुताबिक, इससे एक वैधानिक जिम्मेदारी को निजी व्यक्तियों को सौंपने की स्थिति पैदा होती है।
Updated on:
03 Sept 2026 05:52 pm
Published on:
03 Sept 2026 05:52 pm
