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AI सर्विलांस के जरिए प्रदर्शनकारियों पर नजर, जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस की हाईटेक निगरानी

Delhi Police AI Facial Recognition System: जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने AI आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक से निगरानी शुरू की। प्रदर्शनकारियों की पहचान और निजता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
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नई दिल्ली

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Satya Brat Tripathi

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Updated: 24 Jul 2026, 12:45 PM IST

Delhi Police AI surveillance at Jantar Mantar protest.

दिल्ली पुलिस (Photo- X/@seekingsrishti)

Delhi Police AI Surveillance: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं। इस धरना-प्रदर्शन के बीच दिल्ली पुलिस ने हाईटेक निगरानी की व्यवस्था की है। दरअसल, प्रदर्शन स्थल के पास केरल हाउस के बाहर दिल्ली पुलिस की दो अत्याधुनिक निगरानी वैन खड़ी हैं। इन वैन के जरिए दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही है। इनमें से एक वैन में AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस की छोटी निगरानी वैन 'इक्षणा' में लगे सिस्टम से प्रदर्शनकारियों के चेहरों को स्कैन किया जा रहा है। यह तकनीक कैमरों से मिलने वाली लाइव फुटेज का विश्लेषण करती है। इसके बाद चेहरों का मिलान पुलिस के डेटाबेस में मौजूद तस्वीरों से किया जाता है। पुलिस का कहना है कि इसका उद्देश्य किसी वांछित या अपराधी की पहचान करना है।

दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस के पास अपराधियों का बड़ा डेटाबेस मौजूद है। लाइव सीसीटीवी फुटेज को उसी डेटाबेस से मिलाया जाता है। यदि कोई चेहरा रिकॉर्ड में मौजूद व्यक्ति से मेल खाता है, तो सिस्टम उसे पहचान लेता है। अधिकारी के अनुसार, यह प्रक्रिया केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाई जा रही है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने जताई चिंता

दिल्ली पुलिस की ओर से AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल पर प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों ने चिंता जताई है। छात्रों का कहना है कि लगातार कैमरों की निगरानी के कारण वे अपना चेहरा ढककर प्रदर्शन करने को मजबूर हैं। कुछ छात्रों को डर है कि उनकी तस्वीरें भविष्य में सरकारी नौकरी या अन्य कारणों से उनके खिलाफ इस्तेमाल हो सकती हैं। वहीं, कुछ का कहना है कि उनके परिवार को भी उनकी मौजूदगी का पता चलने का डर बना हुआ है।

डेटा कितने समय तक रहेगा?

दिल्ली पुलिस के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि रिकॉर्ड की गई फुटेज को कितने समय तक सुरक्षित रखा जाएगा, इसके लिए कोई तय समयसीमा नहीं है। यदि भविष्य में किसी घटना की जांच की जरूरत पड़ती है, तो पुरानी फुटेज भी जांच का हिस्सा बन सकती है। इसलिए वीडियो लंबे समय तक सिस्टम में सुरक्षित रह सकते हैं।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

इस निगरानी को लेकर मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच चुका है। जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों की लगातार और व्यापक निगरानी उनके निजता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का उल्लंघन करती है। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि वीडियोग्राफी केवल कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के लिए की जा रही है, न कि किसी की जासूसी या निगरानी के उद्देश्य से।

बढ़ रही है बहस

आपको बता दें कि भारत में पुलिसिंग के लिए AI, फेस रिकग्निशन, सीसीटीवी, ड्रोन और अन्य डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। हालांकि, इन तकनीकों के बढ़ते उपयोग के साथ निजता, पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों को लेकर बहस भी तेज हो गई है। जंतर-मंतर का यह मामला भी अब सुरक्षा और निजता के बीच संतुलन पर नई चर्चा का केंद्र बन गया है।

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