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Supreme Court NEET Paper Leak: NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से कहा- “ऐसे नहीं चल सकता”

NEET Paper Leak Row: लाखों नीट अभ्यर्थियों के भविष्य पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादलों के बीच देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्र सरकार की दलीलों और परीक्षा तंत्र में बार-बार हो रही गड़बड़ियों पर अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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नई दिल्ली

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Manoj Vashisth

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Updated: 24 Jul 2026, 1:09 PM IST

NEET Paper Leak Row

NEET Paper Leak Row : NEET विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दोटूक, केंद्र सरकार से मांगा जवाब ( Photo ANI)

NEET Paper Leak Case: मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में गड़बड़ी और पेपर लीक के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि परीक्षाओं में हो रही बार-बार की गलतियों के सिलसिले पर अब विराम लगना ही चाहिए और इस तरह की व्यवस्था को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अदालत इस पूरे मुद्दे की खुद बेहद बारकी से निगरानी (Close Monitoring) करेगी और नियमित तौर पर इसकी समीक्षा की जाएगी। पीठ ने दोटूक शब्दों में कहा, "हम यह सुनिश्चित करेंगे कि पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से संस्थागत (Institutionalised) और सुरक्षित बनाया जाए।"

प्रिंटिंग से लेकर सेंटर तक: हर कदम का ब्योरा मांग रहा सुप्रीम कोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को बताया कि प्रश्नपत्रों की छपाई (प्रिंटिंग), उनके सुरक्षित परिवहन, बैंक तिजोरियों में रख-रखाव और परीक्षा केंद्रों तक वितरण की पूरी पारदर्शी प्रक्रिया को एक विस्तृत हलफनामे के जरिए अदालत के समक्ष रखा जाएगा।

कोर्ट ने सरकार से सीधा सवाल दागा:

"क्या NEET-UG परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर-बेस्ड (CBT) मोड में ट्रांसफर किया जा सकता है? यदि ऐसा किया जाता है, तो छात्रों के डेटा की सुरक्षा और साइबर सिक्योरिटी को लेकर सरकार के पास क्या पुख्ता इंतजाम हैं?"

राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों पर अमल शुरू

सरकार ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि इसरो (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति (High-Powered Committee) की सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया तेजी से जारी है। समिति ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए व्यापक सुझाव दिए हैं, जिनमें:

सख्त बायोमेट्रिक जांच: मुन्नाभाइयों और फर्जी अभ्यर्थियों को रोकने के लिए बहुस्तरीय सत्यापन।
डिजिटल ट्रैकिंग: प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए जीपीएस (GPS) और लॉक लगे सील्ड वाहनों का उपयोग।
साइबर ऑडिट: डिजिटल डेटा सुरक्षा के लिए नियमित रूप से सुरक्षा आकलन (Cybersecurity Auditing)।

केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि सरकार देश के लाखों छात्रों के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है और समस्याओं का स्थाई समाधान निकालने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।

"सरकार बच्चों के हितों की रक्षा के लिए 10 मील आगे जाकर काम कर रही है। अदालत के समक्ष एक व्यापक और स्पष्ट खाका (Holistic View) पेश करने के लिए थोड़ा और समय दिया जाए।" - तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया

प्रमुख बिंदुप्रस्तावित बदलाव / वर्तमान स्थिति
परीक्षा का स्वरूपपेपर-पेन (OMR) मोड से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) पर विचार
सुरक्षा ढांचाडेटा एन्क्रिप्शन और डिजिटल वॉटरमार्किंग
सुधार पैनलडॉ. के. राधाकृष्णन समिति की 60 में से अधिकांश सिफारिशें लागू
अगली सुनवाई3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अहम मोड़

हालांकि, अदालत ने सख्त लहजे में दोहराया कि "हम इस स्थिति को इस तरह लंबे समय तक नहीं चलने दे सकते।" अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को तय की गई है।

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