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IAS नरेश पाल गंगवार बने उच्च शिक्षा विभाग के सचिव, खीरा सब्सिडी विवाद की वजह से आए थे सुर्खियों में

खीरा सब्सिडी विवाद में सुर्खियों में रहे IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार बने नए उच्च शिक्षा सचिव। जानें पूरा मामला और विवाद की वजह...
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नरेश पाल गंगवार , IAS

नरेश पाल गंगवार , IAS (फोटो-ANI)

IAS Naresh Pal Gangwar: राजस्थान कैडर के IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवार को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है। सीजेपी प्रोटेस्ट के चलते भारी दबाव के बाद मोदी सरकार ने केंद्रीय उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को पद से हटाकर पंचायती राज मंत्रालय में स्थानांतरित कर दिया।

पिछले साल अगस्त महीने में गंगवार को मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन और डेयरी विभाग का सचिव नियुक्त किया गया था। इस पद पर रहने के दौरान उनकी पत्नी, पुत्र और माता को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की योजना के तहत लगभग ₹1.16 करोड़ की सब्सिडी मिली। वहीं, केंद्रीय मंत्री भगीरथ चौधरी को खीरा की खेती के लिए मंत्रालय ने 99 लाख रुपए की सब्सिडी दी थी।

ये मुद्दा सुर्खियों में आने के बाद नरेश पाल गंगवार के राजस्थान कैडर में लौटने की बात चलने लगी थी, लेकिन नई नियुक्ति ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया है। दरअसल, चर्चा थी कि राजस्थान में मौजूदा मुख्य सचिव वी श्रीनिवास का कार्यकाल (सितंबर 2026) पूरा होने के बाद ब्यूरोक्रेसी में कुछ बड़े बदलाव हो सकते हैं। इसमें नरेश पाल गंगवार को उच्च पद के लिए संभावित दावेदार भी माना जा रहा था।

क्या था सब्सिडी विवाद ?

द इंडियन एक्सप्रेस ने 27 जून को अपनी खोजी रिपोर्ट में बताया था कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भगीरथ चौधरी को उनके ही मंत्रालय के अधीन चलने वाली योजना के तहत सरकारी सब्सिडी मिली है। इनके साथ ही एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के परिवार को भी 1.16 करोड़ की सब्सिडी मिली है।

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के पीह गांव में फार्म में एक बोर्ड लिखा है कि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड की ओर से इस परियोजना के लिए 99.60 लाख रुपये की सहायता दी गई है, लेकिन बोर्ड पर यह नहीं लिखा है कि इस योजना का लाभ लेने वाले स्वयं केंद्र की मोदी सरकार में कृषि राज्य मंत्री हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अजमेर से सांसद भगीरथ चौधरी ने अपने खेत में बड़े पैमाने पर खीरे की व्यवसायिक खेती के लिए पॉलीहाउस परियोजना शुरू की। इस परियोजना की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपये बताई गई। केंद्रीय मंत्री ने करीब 49.80 लाख रुपये स्वयं लगाए और करीब 1.49 करोड़ रुपए की सब्सिडी ली। जिसके बाद सरकारी सब्सिडी को सीधे बैंक ऋण खाते में जमा करा दी गई। यह सब्सिडी बागवानी बोर्ड की योजना के तहत दी गई।

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, भगीरथ चौधरी की तरफ से 15 अप्रैल 2025 को परियोजना के लिए आवेदन किया गया। मात्र 14 दिन बाद यानी 29 अप्रैल 2025 को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई। 11 मार्च 2026 को अंतिम स्वीकृति दी गई। 30 मार्च 2026 को लगभग 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी बैंक खाते में जमा कर दी गई। PMO को केंद्रीय मंत्री की तरफ से संपत्ति की जानकारी दी गई थी, लेकिन उसमें योजना का लाभ लेने का कोई जिक्र नहीं था।