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Red Fort Blast Case: कोर्ट ने NIA से मांगा हर आरोपी का रोल नोट, 500 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज

Delhi Red Fort Blast Case: कोर्ट ने दिल्ली के लाल किले में हुए धमाके के मामले का संज्ञान लेने के लिए 27 अगस्त की तारीख तय की है। वकील के मुताबिक, NIA को कोर्ट में एक नोट जमा करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें हर आरोपी की भूमिका के बारे में साफ जानकारी दी जाएगी। इस मामले में 500 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
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नई दिल्ली

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Anand Shekhar

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Updated: 12 Aug 2026, 3:02 PM IST

delhi red fort blast case

लाल किला कार विस्फोट मामले में NIA चार्जशीट में हुआ खुलासा (फोटो- IANS)

Red Fort Blast Case: दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट मामले में NIA की स्पेशल कोर्ट ने केस ट्रांसफर होने के बाद पहली बार सुनवाई की। कोर्ट ने इस मामले का औपचारिक रूप से संज्ञान लेने के लिए 27 अगस्त की तारीख तय की है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी द्वारा दाखिल 7,500 पन्नों की चार्जशीट और विस्तृत दस्तावेजों को देखते हुए कोर्ट ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को निर्देश दिया है कि वे एक संक्षिप्त, टेबल के रूप में नोट जमा करें। इस नोट में हर आरोपी की खास भूमिका और उनके खिलाफ जुटाए गए सबूतों का साफ-साफ विवरण होना चाहिए, ताकि कोर्ट मामले को आसानी से समझ सके।

11 लोगों की हुई थी मौत

यह मामला 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास VBIED (गाड़ी में छिपाकर रखा गया इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) कार धमाके से जुड़ा है, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। NIA ने इस मामले में 14 मई 2026 को मुख्य चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी दाखिल की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, यह हमला 'अंसार गज़वत-उल-हिंद' से जुड़ा है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (AQIS) का एक गुट है।

500 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज

इस मामले में 500 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। कई अहम गवाहों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए NIA ने उन्हें 'सुरक्षित गवाह' घोषित करने के लिए अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की है। इन सुरक्षित गवाहों के बयान सीलबंद लिफाफों में रखे जाएंगे। वकील हरीश सिंह के मुताबिक, ये बयान न तो सार्वजनिक किए जाएंगे और न ही आम केस रिकॉर्ड का हिस्सा बनेंगे।

इसके अलावा, कोर्ट ने मामले के मुख्य आरोपी और कथित सुसाइड बॉम्बर, उमर-उन-नबी की मौत का संज्ञान लिया। कोर्ट ने NIA को मौत की पुष्टि करने वाली रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया ताकि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई खत्म करने का आदेश जारी किया जा सके।

फोन सुविधा और हाई-रिस्क सेल से हटाने के लिए आरोपियों ने दी अर्जी

आरोपियों की ओर से कोर्ट में कई और अर्जियां भी दाखिल की गईं। उनके वकीलों ने जेल प्रशासन और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों की ओर कोर्ट का ध्यान दिलाया। इनमें से कुछ अर्जियों में जेल के अंदर टेलीफोन सुविधा देने की मांग की गई। इसके अलावा, लंबे समय से 'हाई-रिस्क सेल' में रखे गए आरोपियों ने सुरक्षा उपायों में ढील देने और उन्हें आम बैरक में भेजने का अनुरोध किया। कोर्ट कानून के मुताबिक इन सभी अर्जियों पर विचार कर रहा है।

27 अगस्त को सुनवाई

सुनवाई के बाद मीडिया से बात करते हुए वकील हरीश सिंह ने बताया कि कोर्ट ने अभी तक औपचारिक रूप से इस मामले का संज्ञान नहीं लिया है। संज्ञान लेने के बारे में मुख्य सुनवाई और फैसला अब 27 अगस्त को होगा। इस बीच, कोर्ट NIA द्वारा सौंपी जाने वाली 'रोल नोट' और गवाहों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगा।