
दिल्ली में ढही इमारत (Photo-IANS)
Delhi Building Collapse: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक इमारत ढह गई। इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस समेत विभिन्न विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।
दरअसल, सत्य निकेतन एक घनी आबादी वाला पुनर्वास क्षेत्र है, जहां आमतौर पर करीब 55 वर्ग गज के छोटे प्लॉट हैं। इलाके की बड़ी संख्या में संपत्तियों का इस्तेमाल छात्रों के लिए पेइंग गेस्ट (PG) आवास के रूप में किया जाता है।
हिंदुस्स्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में संपत्ति कर रिकॉर्ड के मुताबिक लिखा कि हादसे का शिकार हुई इमारत बेसमेंट के अलावा चार मंजिल की थी। इसके ग्राउंड फ्लोर, पहली और दूसरी मंजिल तथा तीसरी मंजिल के एक हिस्से का निर्माण 1970 से 1980 के बीच हुआ था।
बाद में संपत्ति के एक हिस्से में बेसमेंट और तीसरी मंजिल के शेष हिस्से का निर्माण 1997-98 में किया गया। इमारत लोड-बेयरिंग संरचना पर बनी थी और इसमें आरसीसी (Reinforced Cement Concrete) का फ्रेम नहीं था। इसकी ईंट की दीवारें भी महज करीब 4.5 इंच मोटी थीं।
इमारत के सामने की सड़क व्यावसायिक उपयोग के लिए अधिसूचित है। संपत्ति के ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें चल रही थीं, जबकि ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल PG आवास के रूप में किया जा रहा था।
रिकॉर्ड के मुताबिक, संपत्ति मालिक 2007 से इस उपयोग के लिए लागू कन्वर्जन चार्ज हर साल जमा कर रहे थे। संपत्ति कर रिकॉर्ड में यह भी दर्ज है कि मालिकों ने वर्ष 2020-21 से 2025-26 तक सुनियो योजना का लाभ लिया था।
घटना के बाद मौके पर पहुंचे MCD अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन में सामने आया कि हादसे के समय इमारत में कोई नया निर्माण कार्य नहीं चल रहा था। हालांकि, मालिक की ओर से हाल में मरम्मत और रेनोवेशन का काम कराया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक, हादसे से पहले कई दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण पुराना ढांचा कमजोर हुआ हो सकता है। हालांकि, अंतिम कारण की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
सत्य निकेतन हादसा ऐसे समय हुआ है जब MCD ने अवैध निर्माण और संपत्तियों के अनधिकृत इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रखी है। हाल में साकेत और मालवीय नगर में सामने आए मामलों के बाद भी नगर निगम ने अभियान तेज किया है।
MCD के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 3 सितंबर 2026 के बीच नगर निगम ने 983 संपत्तियों में तोड़फोड़ की कार्रवाई की, 464 संपत्तियों को सील किया। अवैध निर्माण के संबंध में 1,516 कारण बताओ नोटिस जारी किए और सीलिंग से जुड़े 708 कारण बताओ नोटिस जारी किए। इसके अलावा 726 संपत्तियों के खिलाफ ध्वस्तीकरण आदेश जारी किए।
Updated on:
07 Sept 2026 03:01 pm
Published on:
07 Sept 2026 03:01 pm
