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दिल्ली में 7 लाख छात्र, हॉस्टल सिर्फ 8 हजार कमरे! सत्य निकेतन हादसे के बाद उठे बड़े सवाल

दिल्ली में 7 लाख से ज्यादा छात्रों के मुकाबले हॉस्टल की क्षमता करीब 8 हजार कमरों की है। सत्य निकेतन हादसे के बाद छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल की कमी पर सवाल उठे हैं।
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भारत

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Rahul Yadav

Sep 07, 2026

delhi news

दिल्ली पीजी हादसा(फोटो-IANS)

Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में बॉयज PG की इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत के बाद छात्रों की सुरक्षा और हॉस्टल की कमी का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में 7 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं, लेकिन हॉस्टल की क्षमता करीब 7 से 8 हजार कमरों की ही है। ऐसे में बड़ी संख्या में छात्रों को निजी PG और किराए के कमरों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

7 लाख छात्रों के लिए सिर्फ 8 हजार कमरे

दिल्ली विश्वविद्यालय में नियमित, प्रोफेशनल और ओपन लर्निंग कार्यक्रमों को मिलाकर 7 लाख से ज्यादा छात्र हैं। हालांकि, 2024-25 में करीब 2.5 लाख छात्र पंजीकृत थे। विश्वविद्यालय के पास हॉस्टल के कमरों की कोई एक आधिकारिक कुल संख्या उपलब्ध नहीं है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 7 से 8 हजार कमरों की क्षमता है।

यानी पंजीकृत छात्रों के हिसाब से करीब 31 छात्रों में से सिर्फ एक को हॉस्टल में कमरा मिल पाता है। 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 30 हजार से ज्यादा अंडरग्रेजुएट छात्रों ने हॉस्टल के लिए आवेदन किया था लेकिन 10 फीसदी से भी कम छात्रों को जगह मिल सकी।

मजबूरी में PG में रह रहे छात्र

हॉस्टल की सीमित सुविधा का सीधा असर बाहर से दिल्ली आने वाले छात्रों पर पड़ता है। बड़ी संख्या में छात्र निजी PG और किराए के कमरों का सहारा लेते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के आसपास के इलाकों में ऐसे कई PG हैं जहां सीमित जगह में बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं।

सत्य निकेतन भी ऐसा ही इलाका है। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के आसपास बड़ी संख्या में छात्र रहते हैं। रविवार को इसी इलाके में एक बॉयज PG की इमारत ढह गई थी। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई।

हाईकोर्ट ने PG हॉस्टलों के ऑडिट का दिया आदेश

हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों और हॉस्टल की जांच कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि यह देखा जाए कि इन इमारतों के पास जरूरी अनुमति है या नहीं और वे भवन नियमों के मुताबिक बनी हैं या नहीं।

अदालत ने यह भी पूछा है कि इन निजी हॉस्टलों में कितने छात्र रह रहे हैं। अगर PG के लिए पर्याप्त नियम नहीं हैं तो सरकार को नियम बनाने पर विचार करने को कहा गया है। कोर्ट ने निर्माण में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर कार्रवाई की जानकारी देने को भी कहा है।

छात्रों की सुरक्षा पर उठे सवाल

सत्य निकेतन हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि हॉस्टल की कमी के कारण छात्रों को किस तरह की इमारतों में रहना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने भी माना है कि पर्याप्त हॉस्टल नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को निजी PG में जाना पड़ता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति योगेश सिंह ने भी हादसे के बाद कॉलेज प्राचार्यों से छात्रों के रहने की सुविधाओं की समीक्षा करने और चल रही हॉस्टल परियोजनाओं को जल्द पूरा करने को कहा है।

हादसे के बाद MCD पर भी कार्रवाई

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने 5 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है। ढही इमारत की अनुमति और निर्माण नियमों को लेकर भी जांच की जा रही है।

MCD अधिकारियों के मुताबिक, करीब 55 वर्ग गज में बनी यह इमारत ग्राउंड प्लस चार मंजिल की थी। बताया गया कि पहले सिर्फ ग्राउंड प्लस एक मंजिल की अनुमति थी और स्वीकृत बिल्डिंग प्लान भी नहीं था।

अब हाईकोर्ट की जांच और PG हॉस्टलों के ऑडिट के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिल्ली में लाखों छात्रों के लिए सुरक्षित और पर्याप्त आवास की व्यवस्था कब होगी।