
कन्हैया कुमार और अमित शाह। फाइल फोटो- पत्रिका
Delhi Building Collapse: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना को लेकर राजनीति तेज हो गई है। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राजधानी में हादसे को करीब 24 घंटे होने वाले हैं, लेकिन अभी तक मलबा पूरी तरह नहीं हटाया गया है। कन्हैया कुमार ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि हादसे में कितने लोगों की जान गई है, कितने लोग मलबे में दबे हैं और छात्रों की स्थिति क्या है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता लगातार मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं और प्रशासन का सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे लगातार घटनास्थल पर मौजूद हैं और घायलों के सुरक्षित होने की कामना कर रहे हैं। जिन लोगों की जान गई है, उनके परिवारों के प्रति उन्होंने संवेदना जताई। एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर समेत पांच अधिकारियों को निलंबित किए जाने पर भी कन्हैया कुमार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अमित शाह ने इस्तीफा नहीं दिया। अधिकारियों की नियुक्ति गृह मंत्रालय से होती है। ऐसे में अमित शाह का नाम कार्रवाई में क्यों नहीं है?
उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। कन्हैया कुमार ने दिल्ली की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में भाजपा की पांच इंजन वाली सरकार है। स्थानीय पार्षद, स्थानीय विधायक, एमसीडी में मेयर, दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल सभी भाजपा से हैं। इसके बावजूद मामले में लीपापोती क्यों की जा रही है? उन्होंने कहा कि हर मामले में यही देखने को मिलता है। पेपर लीक के बाद कर्मचारियों को पकड़ा जा रहा था, लेकिन एनटीए को भंग नहीं किया गया। उस समय छात्रों ने सरकार से जिम्मेदारी लेने की मांग की थी और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। इसी तरह सत्य निकेतन हादसे में भी सरकार को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी।
कन्हैया कुमार ने कहा कि हादसे के सभी दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए और सरकार को अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की। साथ ही किराए पर नियंत्रण के लिए रेंट कंट्रोल एक्ट लाने की मांग भी की। वहीं, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने एमसीडी अधिकारियों के निलंबन को नाकाफी बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यह केवल दिखावा है और लोगों के साथ धोखा है। ऐसी घटनाएं पहले भी होती रही हैं। जाखड़ ने कहा कि इस बार दबाव ज्यादा है, क्योंकि कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दिनों या दो-तीन महीने बाद निलंबित अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी जाएगी। उन्होंने सवाल किया कि पहले हुई ऐसी घटनाओं में दोषी अधिकारियों का क्या हुआ? कितने अधिकारियों को निलंबित किया गया और कितनों को सजा मिली? उन्होंने कहा कि यह सब दोषियों को बचाने की कोशिश है।
Updated on:
07 Sept 2026 07:07 pm
Published on:
07 Sept 2026 07:05 pm
