
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्र प्रदर्शन कर रहे है (Photo-IANS)
Paper Leak Protest: देश में नीट पेपर लीक, परीक्षाओं में गड़बड़ी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। सड़क से लेकर संसद तक धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहा है। वहीं धर्मेंद्र प्रधान का एक वाकया भी इन दिनों में चर्चाओं में आ गया है, जब उन्होंने खुद पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन किया था।
बात साल 1997 की है, जब ओडिशा में कांग्रेस की सरकार थी और जानकी बल्लभ पटनायक मुख्यमंत्री थे। सीएम आवास के कुछ किलोमीटर दूर राज्य सचिवालय के बाहर करीब 1500 छात्र पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे और इसका नेतृत्व धर्मेंद्र प्रधान द्वारा किया जा रहा था।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान उस उसय ABVP से जुड़े हुए थे। उन्होने जानकी पटनायक सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर आंदोलन किया था।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि धर्मेंद्र प्रधान ने 18 साल की उम्र में छात्र राजनीति में कदम रखा था और ABVP से जुड़ गए। प्रधान ने उत्कल यूनिवर्सिटी से एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) की पढ़ाई की थी। वह नवंबर 1994 से 1997 के बीच दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव भी रहे।
1997 में ओडिशा में पेपर लीक को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। उस समय धर्मेंद्र प्रधान ABVP के राष्ट्रीय सचिव थे। उन्होंने सरकार के खिलाफ पेपर लीक को लेकर मोर्चा खोल दिया और सड़क पर उतर गए। सचिवालय के बाहर धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में छात्रों ने राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह से पीटा गया और उन्हें कुछ फ्रैक्चर भी हुए थे।
धर्मेंद्र प्रधान की छात्र राजनीति ने उनके लंबे राजनीतिक सफर की नींव रखी। 2021 में शिक्षा मंत्री बनने से पहले वह केंद्र सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ओडिशा में BJP के संगठन को मजबूत करने में धर्मेंद्र प्रधान की अहम भूमिका रही है। 2024 में BJP ने पहली बार ओडिशा में सरकार बनाई और दो दशक से ज्यादा समय तक सत्ता में रही नवीन पटनायक की बीजू जनता दल (BJD) सरकार को हटाया।
करीब 27 साल बाद 1997 का वही आंदोलन फिर चर्चा में है। वजह है NEET-UG परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं का विवाद।हाल के दिनों में हजारों छात्रों ने दिल्ली में NEET मामले को लेकर प्रदर्शन किया, जहां पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हुआ। विपक्ष ने इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य सभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि परीक्षा विवाद पर निष्पक्ष चर्चा तभी संभव है, जब शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा दें।
Updated on:
23 Jul 2026 11:15 am
Published on:
23 Jul 2026 11:15 am
