
कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार (इमेज सोर्स: ANI)
DK Shivakumar CM Appointment Challenge :डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने और मंत्रियों के शपथ ग्रहण को चुनौती देने वाली PIL को कर्नाटक हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने साफ कहा कि यह सिर्फ पब्लिसिटी पाने के लिए की गई है। इसी वजह से अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही याचिकाकर्ता पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस विभू बाखरू और जस्टिस केएस हेमलेखा की बेंच ने याचिका को बेमतलब बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल याचिका वापस लेने से काम नहीं चलेगा। न्यायपालिका जनहित याचिका के मंच का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं करेगी और बिना ठोस आधार वाली याचिकाओं पर सख्त रुख अपनाएगी।
दरअसल, डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने और उनके साथ 13 मंत्रियों के शपथ ग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका में याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि यह संविधान के अनुच्छेद 164(1A) का उल्लंघन है। उनका कहना था कि कर्नाटक विधानसभा में 224 सदस्य हैं, इसलिए मंत्रिपरिषद में कम से कम 24 और अधिकतम 33 मंत्री होने चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने शपथ ग्रहण को असंवैधानिक बताया था।
हालांकि, कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस तर्क को पूरी तरह गलत माना। बेंच ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 164(1A) में यह नहीं लिखा है कि मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 12 प्रतिशत से कम नहीं हो सकती। संविधान में केवल इतना कहा गया है कि किसी राज्य में मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की संख्या 12 से कम नहीं होगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, लेकिन कोर्ट ने इससे इनकार कर दिया। जजों ने पूछा कि शपथ लेने वाले मंत्रियों की कुल संख्या कितनी है। जब वकील ने बताया कि मुख्यमंत्री सहित 14 लोगों ने शपथ ली है, तो कोर्ट ने कहा कि 14, 12 से ज्यादा है। ऐसे में संविधान के प्रावधान का उल्लंघन कैसे हुआ?
कोर्ट ने यह भी कहा कि विधानसभा की कुल सदस्य संख्या का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। बेंच के अनुसार याचिका संविधान के प्रावधान को गलत तरीके से समझकर दायर की गई थी। अदालत ने इसे प्रचार पाने की कोशिश बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि इससे न्यायालय का कीमती समय बेवजह बर्बाद हुआ।
Updated on:
16 Jun 2026 04:55 pm
Published on:
16 Jun 2026 02:55 pm
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