
मद्रास हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह राज्यभर के सभी स्कूल प्रशासन को निर्देश जारी करे कि दाखिले के वक्त विद्यार्थी के स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) की पेशी पर जोर नहीं दिया जाए। साथ ही स्कूलों को यह भी निर्दिष्ट करें कि वे बकाया स्कूल फीस अथवा देरी से भुगतान के संबंध में टीसी में किसी भी तरह की अनावश्यक टिप्पणी नहीं करें। न्यायालय ने सरकार से यह भी कहा कि आदेश के उल्लंघन पर आरटीई अधिनियम और अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत उचित कार्रवाई की जाए।
कोर्ट ने माना कि टीसी स्कूलों के लिए अभिभावकों से फीस की बकाया राशि वसूलने का साधन नहीं है। टीसी में फीस के बकाया संबंधी प्रविष्टि बच्चे के चरित्र को कलंकित करेगी और यह शिक्षा के अधिकार अधिनियम की धारा 17 के तहत मानसिक उत्पीड़न का एक रूप है।
कोर्ट सिंगल जज बेंच के आदेश के खिलाफ राज्य की ओर से दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह कहा गया था कि छात्रों के बकाया शुल्क के बारे में शिक्षण संस्थानों इशारा देने से छात्रों या उनके माता-पिता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
Published on:
20 Jul 2024 07:51 am
