
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-IANS)
Donald Trump Stock Trades: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वित्तीय खुलासे ने दुनिया भर के शेयर बाजारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और उनके सलाहकारों ने सिर्फ 90 दिनों में 3,700 से ज्यादा स्टॉक ट्रेड किए, यानी हर दिन औसतन 40 से अधिक सौदे। सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर है कि ट्रेडिंग उन कंपनियों में हुई, जिनका सीधा संबंध अमेरिकी सरकारी नीतियों से है। NVIDIA, Microsoft और Boeing जैसी कंपनियों में करोड़ों रुपये के शेयर खरीदे और बेचे गए। इससे इनसाइडर ट्रेडिंग जैसे सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, व्हाइट हाउस और ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है।
अब बात करते हैं उन कंपनियों की, जिनमें ट्रंप ने भारी-भरकम पैसा लगाया या निकाला। डिस्क्लोजर के अनुसार, ट्रंप ने इस तिमाही के दौरान Nvidia, Oracle, Microsoft, Boeing और Costco जैसी दिग्गज कंपनियों में से प्रत्येक में कम से कम 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 8.3 करोड़ रुपये से ज्यादा) के शेयर खरीदे। इसके अलावा Amazon, Meta, Uber, eBay, Abbott Laboratories, AT&T और Dollar Tree में भी जमकर ट्रेडिंग हुई।
इस खेल का सबसे बड़ा मोड़ 10 फरवरी को आया। उस दिन ट्रंप ने माइक्रोसॉफ्ट, मेटा (फेसबुक) और एमेजॉन में अपनी हिस्सेदारी बेच दी, जिसकी कीमत 5 मिलियन डॉलर से 25 मिलियन डॉलर (करीब 41 करोड़ से 200 करोड़ रुपये से ज्यादा) के बीच थी। सिर्फ इतना ही नहीं, नेटफ्लिक्स, वार्नर ब्रदर्स डिस्कवरी और पैरामाउंट ग्लोबल जैसी मीडिया कंपनियों में भी बड़ा निवेश पाया गया है।
यहीं से असली विवाद और इनसाइडर ट्रेडिंग की आशंकाओं को हवा मिलती है, क्योंकि जिन कंपनियों में ट्रेडिंग हुई उनका सीधा संबंध वॉशिंगटन की सरकारी नीतियों से है। एनवीडिया को चीन को एडवांस एआई चिप एक्सपोर्ट करने के लिए अमेरिकी सरकार की मंजूरी चाहिए होती है, जबकि बोइंग पूरी तरह अमेरिकी सरकार के डिफेंस और एयरोस्पेस कॉन्ट्रैक्ट्स पर निर्भर है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट, अमेजन और मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियां लगातार अमेरिकी एंटीट्रस्ट जांच और एआई रेगुलेशन के दायरे में रहती हैं।
आरोप लग रहे हैं कि भले ही कोई कानून न टूटा हो, लेकिन देश के राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ऐसी आक्रामक ट्रेडिंग करना सीधे तौर पर 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (हितों के टकराव) का मामला है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच. डब्लू. बुश और बिल क्लिंटन अपने कार्यकाल के दौरान 'ब्लाइंड ट्रस्ट' का इस्तेमाल करते थे, ताकि उनके बिजनेस और सरकारी फैसलों में कोई संबंध न दिखे। लेकिन ट्रंप ने अपने बिजनेस को पूरी तरह अलग नहीं किया और उनके बेटे अब भी ट्रंप ऑर्गनाइजेशन को संभाल रहे हैं।
इस विवाद ने एक पुराने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है। कुछ महीने पहले तेल और स्टॉक फ्यूचर्स मार्केट में बेहद संदिग्ध ट्रेडिंग देखी गई थी। ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत में प्रगति का संकेत देने वाला सार्वजनिक बयान जारी किया था, लेकिन उससे ठीक पहले कुछ ट्रेडर्स ने कच्चे तेल की कीमत गिरने और अमेरिकी शेयर बाजार बढ़ने पर अरबों रुपये का दांव लगा दिया था। बयान आने के बाद बाजार बिल्कुल उसी दिशा में चला। ट्रंप का इससे सीधा संबंध साबित नहीं हुआ, लेकिन ट्रेडिंग की टाइमिंग इतनी सटीक थी कि दुनिया भर में सवाल उठने लगे।
उधर, ट्रंप के दामाद और मौजूदा मिडिल ईस्ट दूत जारेड कुशनर के खाड़ी देशों के निवेशकों के साथ वित्तीय रिश्ते भी रडार पर आ गए हैं। ब्लूमबर्ग ने बताया कि कुशनर खाड़ी क्षेत्र से जुड़े अपने निवेश हितों को बनाए रखे हुए हैं, और साथ ही ट्रंप प्रशासन के लिए इस क्षेत्र में एक अहम कूटनीतिक भूमिका भी निभा रहे हैं। उनकी इन्वेस्टमेंट फर्म 'अफिनिटी पार्टनर्स' सऊदी अरब और अन्य मिडिल ईस्ट निवेशकों के फंड्स की मदद से अरबों डॉलर का प्रबंधन करती है। एथिक्स वॉचडॉग्स का कहना है कि इतने संवेदनशील राजनयिक पद पर रहते हुए विदेशी फंड्स से जुड़े रहना गंभीर सवाल खड़े करता है।
चौतरफा घिरने के बाद अब इस पूरे मामले पर अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय और ट्रंप की कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने ब्लूमबर्ग से बातचीत में साफ कहा कि 'ट्रम्प केवल अमेरिकी जनता के सर्वोत्तम हितों में ही काम करते हैं' उन्होंने कहा कि 'हितों का कोई टकराव नहीं है। 'वहीं, ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के प्रवक्ता ने भी सफाई देते हुए बयान दिया 'ट्रंप के निवेशों का प्रबंधन बाहरी वित्तीय संस्थानों द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाता है, और न तो ट्रंप और न ही उनका परिवार व्यक्तिगत सौदों का सीधे तौर पर प्रबंधन करता है।'
दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि कई वित्तीय फाइलिंग तय समय सीमा के बाद जमा की गईं, जिसके लिए प्रति फाइलिंग 200 डॉलर का मामूली जुर्माना भी लगा। अब वॉशिंगटन की सियासत में यह बहस सबसे बड़ी हो चुकी है कि क्या किसी सिटिंग प्रेसिडेंट को उन कंपनियों के शेयर बाजार में खेलने की इजाजत होनी चाहिए, जिनकी किस्मत खुद राष्ट्रपति के एक दस्तखत से बदल सकती है?
Published on:
18 May 2026 03:34 pm
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