
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Photo-IANS)
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग को रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने इतनी कड़ी शर्तें (Trump's conditions for Iran) रख दी हैं कि तेहरान के लिए इन्हें मानना आसान नहीं होगा। पाकिस्तान के माध्यम से हुई बातचीत में अमेरिका ने साफ कह दिया है - कोई मुआवजा नहीं, 400 किलो समृद्ध यूरेनियम हमें सौंप दो, और सिर्फ एक परमाणु साइट चलने दो। ये शर्तें जारी रखने के लिए हैं ताकि युद्ध पूरी तरह खत्म हो सके।
अमेरिकी पक्ष ने कोई भी युद्ध क्षति मुआवजा देने से साफ इनकार कर दिया है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए जो प्रस्ताव भेजा था, उसमें मुआवजे की मांग थी, लेकिन वाशिंगटन ने उसे ठुकरा दिया। इसके अलावा अमेरिका 400 किलो समृद्ध यूरेनियम ईरान से लेना चाहता है।ईरान के फ्रोजन एसेट्स का 25 प्रतिशत हिस्सा अभी भी रिलीज नहीं किया जाएगा। सिर्फ एक परमाणु सुविधा को ही काम करने की इजाजत मिलेगी, बाकी सब बंद करने होंगे। लेबनान समेत पूरे इलाके में लड़ाई रोकने के मुद्दे को भी बातचीत से सुलझाना होगा। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये शर्तें पूरी होने पर ही स्थायी शांति हो सकती है।
ईरान ने अपना प्रस्ताव दिया था जिसमें कई अहम बातें शामिल थीं। सबसे पहले सभी मोर्चों पर लड़ाई बंद हो - खासकर इजरायल की लेबनान में कार्रवाई। फ्रोजन एसेट्स तुरंत रिलीज किए जाएं और आर्थिक प्रतिबंध हटा लिए जाएं। युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा अमेरिका दे और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता दे।हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के 20 प्रतिशत तेल का रास्ता है। ईरान ने पहले इसे बंद कर दिया था, जिससे पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ गई थीं।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए। ईरान ने जवाब में खाड़ी देशों में हमले किए और हॉर्मुज बंद कर दिया। 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में अस्थायी युद्धविराम हुआ। लेकिन इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रही।ट्रंप ने बाद में युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि अगर ईरान अमेरिकी शर्तें नहीं मानेगा तो फिर से कार्रवाई हो सकती है।
अमेरिका का कहना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम दुनिया के लिए खतरा है, इसलिए उसे सीमित करना जरूरी है। वहीं ईरान खुद को बचाने और अपनी संप्रभुता बचाने की बात कर रहा है। क्षेत्रीय तनाव अभी भी बहुत ज्यादा है। लेबनान, इजरायल और खाड़ी देशों में स्थिति अस्थिर बनी हुई है।दोनों देशों के बीच स्थायी समझौता तभी संभव लगता है जब ये सारी शर्तें और मांगें किसी मध्य रास्ते पर पहुंचें। फिलहाल बातचीत जारी है, लेकिन नतीजे अभी दूर दिख रहे हैं। आम लोगों की चिंता है कि अगर बात नहीं बनी तो फिर तेल की कीमतें बढ़ेंगी और पूरा इलाका अस्थिर हो जाएगा।
Published on:
18 May 2026 07:20 am
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