
DRDO कर्मचारी से 15 लाख रुपये की ठगी (X Photo)
DRDO Employee Cyber Fraud: DRDO कर्मचारी से ऑनलाइन निवेश स्कीम के नाम पर 15 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने पहले वर्क फ्रॉम होम टास्क और छोटे मुनाफे का लालच देकर भरोसा जीता। बाद में हाई रिटर्न निवेश योजनाओं में पैसा लगवाकर पूरी रकम हड़प ली। पुलिस ने जांच के बाद हरियाणा और राजस्थान से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और पूरे साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जांच जारी है।
पुलिस जांच के मुताबिक, ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस पूरे मामले को अंजाम दिया। पीड़ित को पहले एक वर्क-फ्रॉम-होम जैसी स्कीम में जोड़ा गया, जहां उसे आसान टास्क और शुरुआती निवेश पर छोटे-छोटे मुनाफे दिखाए गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि पीड़ित को एक ग्रुप में शामिल किया गया था, जिसके बाद उसे ट्रेनिंग दी गई और कई वेबसाइटों पर रजिस्टर करने के लिए कहा गया। शुरू में, टास्क पूरे करने और पैसे जमा करने पर उसे मुनाफा हुआ, जिससे धोखाधड़ी करने वालों को उसका भरोसा जीत दिया
जैसे-जैसे पीड़ित का भरोसा बढ़ा, उसे चार्टर लीज, बोनस टास्क और अन्य निवेश योजनाओं में ज्यादा पैसा लगाने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस के अनुसार, कई बार में पैसे ट्रांसफर कराए गए और कुल मिलाकर करीब 15.74 रुपये लाख निवेश करवा लिए गए। जब पीड़ित ने अपनी ऑनलाइन अकाउंट में दिख रही राशि निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने उससे और पैसे की मांग शुरू कर दी।
पैसे निकालने के नाम पर पेनल्टी जैसी शर्तें लगाई गईं, जिससे पीड़ित और उलझ गया। जब लगातार दबाव बढ़ता गया और कोई पैसा वापस नहीं मिला, तब उसे शक हुआ कि वह ठगी का शिकार हो चुका है। इसके बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर e-FIR दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस ने डिजिटल सबूतों और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की। तकनीकी सर्विलांस के जरिए अलग-अलग राज्यों में पैसे के लेन-देन को ट्रैक किया गया। जांच में सामने आया कि यह एक संगठित नेटवर्क है जो अलग-अलग लोगों के खातों के जरिए पैसा घुमाता है।
जांच के दौरान पुलिस ने सबसे पहले 7 जून को करनाल से एक आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद 8 जून को दिल्ली के पीतमपुरा से दूसरे आरोपी को पकड़ा गया। वहीं 9 जून को हिसार से तीसरे आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जो पहले पुलिस की छापेमारी से बच निकलने में सफल रहा था।
पुलिस ने बताया कि परीक्षित फ्रॉड की रकम का पहला लेयर अकाउंट होल्डर था, जबकि संदीप दूसरे लेयर में पैसे को आगे ट्रांसफर करने का काम करता था। सचिन उन बैंक खातों को उपलब्ध कराता था जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम घुमाने में किया गया।
Published on:
11 Jun 2026 03:57 pm
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