20 अगस्त 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

DRDO का बड़ा दांव, मिसाइल बनाने में जुड़ेंगी निजी कंपनियां

DRDO ने निजी कंपनियों को मिसाइल और बम बनाने में साझेदार बनने का मौका दिया है। जानें किन कंपनियों को मिलेगा मौका, क्या हैं शर्तें और टर्नओवर की सीमा।
2 min read
Google source verification
DRDO

DRDO (File Photo)

देश के रक्षा निर्माण में अब निजी कंपनियों की भी भागेदारी होगी। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन ने घरेलू निजी कंपनियों को मिसाइल व बम हथियार सिस्टम प्रोजेक्ट्स के विकास व उत्पादन में सहभागी बनने के लिए आमंत्रित किया है। DRDO ने इस बाबत एक एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EoI जारी किया है।

DRDO ने कहा कि इस ईओआई का मकसद मिसाइल और स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स क्लस्टर के तहत आने वाले मिसाइल और बम हथियार प्रणाली प्रोजेक्ट्स के लिए विकास और उत्पादन साझेदार यानी DcPP चुने जाएंगे। आसान भाषा में समझें तो अब निजी कंपनियां भी इन हथियारों को बनाने और डिजाइन करने की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगी।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे प्रयोग

DRDO पहले ही पब्लिक और प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए अग्नि, पृथ्वी और आकाश मिसाइलों व पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को निजी सहयोग से बना चुकी है। अब इस पार्टनरशिप मॉडल के तहत चुनी गई कंपनियों को पहले DRDO की तकनीकी, उत्पादन और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी शर्तों को पूरा करना होगा।

DRDO के विकास और यूजर ट्रायल्स के पूरा होने के बाद निजी कंपनियां तीनों सेनाओं से उत्पादन ऑर्डर पूरे करने के लिए DRDO द्वारा पहचानी गई सप्लाई चेन के साथ काम कर सकती है। EoI में कहा गया है कि संबंधित DRDO लैब की मंजूरी मिलने पर इंडस्ट्री पार्टनर्स हथियारों के लाइफ-साइकिल के दौरान तीनों सेनाओं को अपग्रेड और इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स सपोर्ट भी दे सकते हैं।

टर्नओवर की शर्त क्या रखी गई है

EoI में साफ कहा गया है कि कंपनी की कम से कम 100 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर होनी चाहिए, तभी वह इस योजना के लिए योग्य मानी जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कंपनी 50 से 100 यूनिट तक का बड़ा उत्पादन संभालने में सक्षम है या नहीं। इसके लिए उसका इन्फ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी क्षमता और मैनेजमेंट टीम की जांच होगी।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और कदम

यह पूरी पहल सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि देश में ही रक्षा उत्पादों का निर्माण बढ़े और बाहर से हथियार मंगाने की जरूरत कम हो। ऐसे में DRDO का यह कदम आने वाले समय में भारत की रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई दे सकता है।